अमरावती हादसे के बाद नासिक सिविल अस्पताल अलर्ट! मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल, जानें फायर ऑडिट की स्थिति

Nashik Civil Hospital Safety: अमरावती नवजात हादसे के बाद नासिक सिविल अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा तेज हुई है। अस्पताल में साल में दो बार पीडब्ल्यूडी के माध्यम से फायर ऑडिट कराया जाता है।
Nashik Hospital Fire Safety Audit
नवजात शिशु हादसे के बाद नासिक सिविल अस्पताल सतर्कफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
Published on
Updated on

Nashik Hospital Fire Safety Audit: अमरावती के जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में शॉर्ट सर्किट के कारण हुए विस्फोट में नवजात शिशुओं की मौत की दुखद घटना सामने आई है। इस भीषण हादसे की पृष्ठभूमि में नासिक जिला प्रशासन और स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह सतर्क हो गई है।

नासिक का सिविल अस्पताल उत्तर महाराष्ट्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। अमरावती की घटना के बाद मरीजों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। अस्पताल की सुरक्षा पर बात करते हुए प्रभारी सिविल सर्जन डॉ। सतीश शिंपी ने बताया कि सिविल अस्पताल का वर्ष में दो बार सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से नियमित फायर ऑडिट कराया जाता है। कुछ महीनों पहले ही यह ऑडिट पूरा हुआ है।

लंबित फायर ऑडिट की रिपोर्ट तलब

नासिक सिविल अस्पताल के तहत जिले के कई उप-जिला और ग्रामीण अस्पताल आते हैं। इन सभी अस्पतालों का भी फायर ऑडिट किया जाता है। अमरावती की घटना के बाद, जिले के किन अस्पतालों का ऑडिट पूरा हो चुका है और कहां बाकी है, इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। डॉ। शिंपी ने स्पष्ट किया कि जिन इमारतों का फायर ऑडिट बाकी है, उनकी तत्काल समीक्षा कर आवश्यक मापदंडों की पूर्ति की जाएगी। दूसरी ओर, नासिक में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए करोड़ों श्रद्धालु

शहर व जिले में पहुंचेंगे। इस अवधि में स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव रहने की संभावना है। इसे देखते हुए सिविल अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में 'फायर ऑडिट' और 'इलेट्रिकल ऑडिट' के साथ अन्य सभी तकनीकी सुरक्षा पहलुओं को समय रहते पूरा करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

अस्पतालों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय

जिले के सभी शासकीय और निजी अस्पताल अपने आईसीयू, एनआईसीयू, पीआईसीयू, सीसीयू और संपूर्ण इमारत का फायर, इलेक्ट्रिकल और लिफ्ट ऑडिट (यदि पिछले 6 महीनों में न हुआ हो) तुरंत पूरा करें, एनआईसीयू और आईसीयू में वेंटिलेटर, वार्मर, मॉनिटर जैसे उपकरणों का विद्युत भार जांचकर ओवरलोड और शॉर्ट सर्किट की संभावना को खत्म किया जाए।

Nashik Hospital Fire Safety Audit
NH-44 केलापुर फ्लाईओवर मामला, 1 साल बाद भी अधूरा निर्माण, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं पर भी मंडराया खतरा

अस्पतालों में ऑक्सीजन और फायर सेफ्टी पर सख्ती

ऑक्सीजन पाइपलाइन और सिलेंडर का भंडारण सुरक्षित स्थानों पर किया जाए, फायर एक्सटिग्विशर, स्मोक डिटेक्टर्स और फायर अलार्म सिस्टम पूरी तरह क्रियाशील स्थिति में होना सुनिश्चित किया जाए। आपात स्थिति में बाहर निकलने के मार्ग बिना किसी रुकावट के पूरी तरह खुले रखे जाएं। आपातकालीन परिस्थितियों में नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए और नियमित 'मॉक ड्रिल' आयोजित की जाए।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com