NCP Merger News: ‘बीजेपी से पूछकर ही होगा फैसला’, एनसीपी के विलय पर छगन भुजबल का सबसे बड़ा बयान
Chhagan Bhujbal On NCP Merger: एनसीपी नेता छगन भुजबल ने स्पष्ट किया है कि शरद पवार गुट के साथ विलय का कोई भी फैसला बीजेपी और मुख्यमंत्री की सहमति के बिना संभव नहीं है।
- Written By: अनिल सिंह
Chhagan Bhujbal On NCP Merger (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
BJP Approval for NCP Merger: महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के एक साथ आने की अटकलें तेज हैं। शरद पवार गुट के दावों ने इस चर्चा को हवा दी है कि दोनों पार्टियां 12 फरवरी को विलय करने वाली थीं। हालांकि, अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल ने इस पूरे मामले पर एक बड़ा और व्यावहारिक बयान दिया है। भुजबल ने स्पष्ट किया कि एनसीपी का भविष्य और NCP का विलय कोई भी निर्णय अकेले नहीं लिया जा सकता; इसके लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और महायुति के नेतृत्व की सहमति अनिवार्य होगी।
सोमवार (2 फरवरी) को नासिक में मीडिया से बातचीत करते हुए भुजबल ने गठबंधन धर्म की मर्यादाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अजित दादा के साथ हमने एनडीए में शामिल होने का फैसला किया था, इसलिए अब कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले बीजेपी से पूछना और उन्हें विश्वास में लेना जरूरी है। भुजबल का यह बयान उन दावों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा था कि अजित पवार अपनी पार्टी का शरद पवार की पार्टी में विलय करने के लिए मानसिक रूप से तैयार थे।
सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में ही होगा अगला निर्णय
छगन भुजबल ने स्पष्ट किया कि अजित पवार के बाद अब सुनेत्रा पवार पार्टी की आधिकारिक नेता और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा, “सुनेत्रा पवार ही हमारी नेता हैं और आगे का जो भी फैसला होगा, वह उनकी अगुवाई में ही लिया जाएगा।” भुजबल ने यह भी स्वीकार किया कि संभव है विलीनीकरण को लेकर शीर्ष स्तर पर कोई बातचीत हुई हो, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उन्हें इस तरह की किसी बैठक या डील की आधिकारिक जानकारी नहीं थी। उनके अनुसार, अब गेंद सुनेत्रा पवार और पार्टी के कोर ग्रुप के पाले में है।
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सामूहिक सहमति और सीएम का समर्थन जरूरी
विलीनीकरण की प्रक्रिया को लेकर भुजबल ने संवैधानिक और राजनीतिक पेचों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विलय जैसा बड़ा फैसला सामूहिक रूप से लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के समर्थन को भी महत्वपूर्ण बताया। गौर करने वाली बात है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी हाल ही में कहा था कि यदि अजित पवार ऐसा कोई बड़ा कदम उठाने वाले होते, तो वे निश्चित रूप से उन्हें सूचित करते। भुजबल के बयान से साफ है कि पार्टी फिलहाल एनडीए से अलग होकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
पिंपरी-चिंचवड़ से शुरू हुआ था ‘साथ’ आने का सिलसिला
दोनों गुटों के बीच नजदीकियां तब चर्चा में आईं जब हालिया महानगरपालिका चुनावों में पिंपरी-चिंचवड़ में शरद पवार और अजित पवार के गुटों ने मिलकर चुनाव लड़ा। इसके बाद 7 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों में भी दोनों गुटों के साथ आने की खबरें थीं। सूत्रों का दावा है कि अजित पवार खुद शरद पवार गुट के साथ चर्चा कर रहे थे और 12 फरवरी को आधिकारिक घोषणा की तैयारी थी। अब अजित दादा के निधन के बाद यह सवाल कायम है कि क्या सुनेत्रा पवार और अन्य वरिष्ठ नेता उस ‘अधूरे संवाद’ को आगे बढ़ाएंगे या बीजेपी के साथ अपना मजबूत रिश्ता बरकरार रखेंगे।
