नासिक में जेलरोड की 100 साल पुरानी पानी की टंकी पर चला बुलडोजर, बिना नोटिस दिए मनपा की कार्रवाई से उठे सवाल

JCB Demolition In Nashik: नासिक के जेलरोड पर 100 वर्ष पुरानी ब्रिटिशकालीन पानी की टंकी को आधी रात में बिना पूर्व सूचना ढहा दिया गया। कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों में नाराजगी, कारण अब तक स्पष्ट नहीं।
British Era Water Tank JCB Demolition In Nashik Jail Road Citizens Protest
100 साल पुरानी पानी की टंकी धवस्त (फोटो नवभारत)
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JCB Demolition In Nashik Jail Road: जेलरोड इलाके की एक पुरानी पहचान और ऐतिहासिक धरोहर रही ब्रिटिशकालीन पानी की टंकी को आधी रात के समय ढहा दिया गया है। पिछले कई दशकों से यह वास्तुकला इस क्षेत्र के नागरिकों के जीवन और भूगोल का एक अहम हिस्सा थी। अचानक हुई इस तोड़फोड़ की कार्रवाई के कारण परिसर के नागरिकों के बीच यह घटना चर्चा का विषय बन गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, आधी रात के करीब जेसीबी मशीनों की मदद से इस टंकी को पूरी तरह से हटा दिया गया।

वर्षों पुरानी धरोहर के ध्वस्तीकरण से नागरिक आहत

ब्रिटिश काल में निर्मित यह पानी की टंकी लगभग 100 वर्ष से अधिक पुरानी बताई जाती है और लंबे समय से जेलरोड क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा रही है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि क्षेत्र की विरासत और इतिहास का प्रतीक थी।

कुछ नागरिकों ने पहले भी इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की मांग की थी, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी ऐतिहासिक महत्ता को समझ सकें। लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के आधी रात में इसे ढहा दिए जाने से लोगों में गहरा दुख और नाराजगी है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुरानी इमारतें और संरचनाएं किसी भी शहर की सांस्कृतिक पहचान होती हैं। उनका मानना है कि यदि इस टंकी का संरक्षण किया जाता, तो यह नाशिक की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती थी।

कार्रवाई का कारण अभी भी अस्पष्ट

ब्रिटिशकालीन पानी की टंकी को ढहाने की कार्रवाई के बाद भी नासिक मनपा या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। इससे स्थानीय नागरिकों के बीच कई तरह की चर्चाएं और सवाल उठ रहे हैं। लोगों का अनुमान है कि सड़क चौड़ीकरण, सुरक्षा संबंधी कारणों या किसी प्रस्तावित विकास परियोजना के लिए इस स्थान को खाली कराया गया होगा।

हालांकि, प्रशासन ने अब तक इन संभावनाओं की न तो पुष्टि की है और न ही कोई विस्तृत जानकारी साझा की है। नागरिकों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक संरचना को हटाने से पहले सार्वजनिक सूचना और कारण स्पष्ट किए जाने चाहिए थे। अब सभी की नजर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

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