शिव मंदिर को गिराने की साजिश रच रहा था खरात, नासिक में बढ़ा विवाद, युवाओं ने खोली 'कैप्टन' की पोल

Ashok Captain Kharat Nasik Case: 12वीं सदी के प्राचीन शिव मंदिर को गिराने की 'कैप्टन' खरात की साजिश नाकाम! फर्जी एप से फैलाई नकारात्मकता। युवाओं की सतर्कता से बचा ऐतिहासिक मंदिर।
Self-styled godman Ashok Kharat plotted to demolish a 12th-century Shiva temple in Vavi, Nasik using a fake 'Energy' app. Exposed by alert local youth.
अशोक खरात मामला (फाइल फोटो)
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Shiv Mandir Restoration Scam: नासिक के कथित स्वयंभू बाबा अशोक खरात का वावी के प्राचीन शिव मंदिर को लेकर एक और हैरान करने वाला कारनामा उजागर हुआ। वावी गांव में 12वीं शताब्दी का यादवकालीन प्राचीन शिव मंदिर स्थित है। इस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए ग्रामवासियों ने खरात को आमंत्रित किया था लेकिन उसने मंदिर को सुधारने की बजाय उसे पूरी तरह गिराने की सलाह दे डाली।

उसने ग्रामीणों से कहा कि इस मंदिर को यहां मत रखो, इसे तोड़ दो और इसमें मौजूद देवताओं को भी हटा दो। इतना ही नहीं, खरात ने मंदिर के शिवलिंग की ओर पैर करके खड़े होकर दावा किया कि इसमें अब कोई ऊर्जा नहीं बची है और मंदिर में 50 प्रतिशत नकारात्मक ऊर्जा होने की बात कहकर लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। लोगों का विश्वास जीतने के लिए खरात ने एक नकली मोबाइल एप का इस्तेमाल करता था।

यह एप किसी वस्तु की उम्र या उसमें मौजूद 'एनर्जी' मापने का दावा करता था। वह इसे अलेक्सा जैसे कमांड देकर चलाता और लोगों को भ्रमित करता था। आरोप है कि मिरगांव में अपने 'ईशान्येश्वर मंदिर' में लोगों की भीड़ बढ़ाने के मकसद से उसने वावी के इस प्राचीन मंदिर को बदनाम करने की साजिश रची। ग्रामीणों के मुताबिक, उसने जानबूझकर इस ऐतिहासिक मंदिर की छवि खराब करने की कोशिश की।

पुरातन धरोहर को मिटाने की कोशिश

यह मंदिर काशी विश्वेश्वर का स्थान माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि भगवान राम भी यहां से गुजरे थे। करीब एक साल पहले ग्रामीणों ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए खरात को बुलाया था लेकिन उसने मरम्मत की बजाय इसे तोड़ने की योजना सुझाई।

अशोक खरात कथित तौर पर 'जग्गों' नाम के एक एप का उपयोग कर मंदिर के पत्थरों और स्तंभों की 'एनर्जी मापने का नाटक करता था और दावा करता था कि यहां 'माइनस 50 प्रतिशत ऊर्जा' है, उसने यहां तक कहा कि यहां अब भगवान नहीं है, इसलिए दर्शन करना बंद करें और मंदिर को गिरा दे।

युवाओं की सतर्कता से खुली पोल

खरात की बातों में आकर कुछ बुजुर्ग मंदिर तोडने के लिए तैयार भी हो गए थे लेकिन गांव के शिक्षित युवाओं ने उसकी 'डिजिटल ठगी' को पहचान लिया। उन्होंने साबित किया कि ऐसा कोई एप असली नहीं है और खरात का पूरा दावा झूठा है। इस सतर्कता के कारण यह ऐतिहासिक मंदिर बच गया।

मंदिर के पुजारियों और ग्रामीणों ने कहा कि उसके बड़े संबंधों के कारण हम पहले चुप थे लेकिन अंदर ही अंदर बहुत आक्रोश था। अब सामने आया है कि खरात ने अपने मिरगांव स्थित 'शिवनिका (ईशान्येश्वर) मंदिर' की ओर श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए यह पूरा षड्यंत्र रचा था।

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