अशोक खरात (सौजन्य-सोशल मीडिया)
SIT Ashok Kharat: नासिक में खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले कथित स्वयंभू बाबा अशोक खरात की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उसके कथित काले कारनामों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिर्डी में जमीन घोटाले का मामला सामने आने के बाद अब एक और गंभीर आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि खरात ने अपने बंगले के पास स्थित एक जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की है।
खास बात यह है कि यह जमीन स्वाध्याय परिवार को तत्त्वज्ञान विद्यापीठ के लिए दान में दी गई थी। नासिक के कर्मयोगीनगर इलाके में स्थित खरात के ‘तृप्तबाला’ बंगले से सटी स्वाध्याय परिवार की इस जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद शहर में हड़कंप मच गया है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक नामी बिल्डर ने करीब 4 साल पहले 477 वार का यह भूखंड स्वाध्याय परिवार को आध्यात्मिक कार्यों के लिए दान किया था।
इस जमीन का सातबारा रिकॉर्ड भी तत्त्वज्ञान विद्यापीठ के नाम पर दर्ज है। इसके बावजूद खरात और उसके परिवार के लोगों द्वारा इस जमीन का उपयोग ऐसे किया जा रहा है मानो वह उनकी निजी संपत्ति हो।
बताया जाता है कि इस भूखंड को पहले से ही घेराबंदी कर पौधारोपण किया गया था जिसका फायदा उठाकर कब्जे की कोशिश की गई।
इस पूरे मामले को लेकर स्वाध्याय परिवार के सदस्यों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यह जमीन हमारी है, खरात ने किसकी अनुमति से इस पर कब्जा किया? उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार, खरात की संपत्तियों की जांच कर रही एसआईटी को अब इस जमीन मामले की जांच भी सौंपी जा सकती है।
महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण और आर्थिक ठगी के आरोप में गिरफ्तार अशोक खरात के मामले में रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। गिरफ्तारी के बाद शुरुआत में खुद को ‘धार्मिक प्रभाव’ वाला बताकर पुलिस को ही श्राप देने और डराने की कोशिश करने वाला अशोक खरात अब पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है।
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एसआईटी की सख्त पूछताछ के बाद उसका रवैया बदल गया है और सूत्रों के अनुसार वह हिरासत में कई बार फूट-फूटकर रो चुका है। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के पहले सप्ताह में खरात बेहद आत्मविश्वास में था।
वह एसआईटी अधिकारियों से न केवल अभद्र तरीके से पेश आया बल्कि उन्हें यह कहकर डराने की कोशिश करता रहा कि ‘तुम पाप कर रहे हो, तुम्हें भगवान का कोप झेलना पड़ेगा।’ उसे भरोसा था कि कथित राजनीतिक समर्थन के चलते उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा। हालांकि जैसे-जैसे एसआईटी ने सबूत जुटाने शुरू किए और उसके कारनामों की परतें खुलने लगीं।