Ashok Kharat Case Eknath Shinde Inquiry (फोटो क्रेडिट-X)
Ashok Kharat Eknath Shinde: नासिक के ‘भोंदू बाबा’ अशोक खरात मामले की आंच अब महाराष्ट्र के सत्ता गलियारों के शीर्ष तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा विधानसभा में किसी को भी न बख्शने की घोषणा के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की भी इस मामले में जांच होगी?
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) ने दावा किया है कि 2022 में मुख्यमंत्री रहते हुए एकनाथ शिंदे ने खरात के मंदिर का दौरा किया था, जो संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा अंधविश्वास को बढ़ावा देने जैसा था।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की राज्य सचिव एडवोकेट रंजना गवांदे के अनुसार, अक्टूबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नासिक के ईशान्येश्वर मंदिर का दौरा किया था। उनके साथ कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और दीपक केसरकर भी मौजूद थे। अंनिस का तर्क है कि रसूखदार नेताओं के ऐसे दौरों से ही अशोक खरात जैसे पाखंडी बाबाओं का मनोबल बढ़ा और उन्हें समाज में ‘वैधता’ मिली। उस समय भी समिति ने प्रांताधिकारी को पत्र सौंपकर इस दौरे का कड़ा विरोध किया था।
ये भी पढ़ें- फिर नींबू-मिर्ची से खत्म हो जाएंगे पाकिस्तान के आतंकवादी! देवेंद्र फडणवीस ने सदन में ऐसा क्यों कहा?
विधानसभा में मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट कहा था कि खरात को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति, चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या राजनेता, उसे बख्शा नहीं जाएगा। अब विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता सवाल कर रहे हैं कि क्या यह नियम उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी लागू होगा? अहिल्यानगर के पालक मंत्री विखे पाटिल ने भी शुरुआत में स्वीकार किया था कि वे और शिंदे उस मंदिर में गए थे, जिससे अब राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
एडवोकेट गवांदे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2014 के बाद से राज्य में ढोंगी बाबाओं में एक तरह का ‘उन्माद’ और निडरता आई है। उन्होंने कहा, “वरमाई (दूल्हे की मां) जैसी होगी, वैसा ही वऱ्हाड (बाराती) होगा। अगर नेता ही अंधविश्वास के पीछे भागेंगे, तो जनता और कार्यकर्ता भी उन्हीं का अनुसरण करेंगे।” अंनिस ने मांग की है कि केवल खरात के अपराधों की ही नहीं, बल्कि उसे राजनीतिक संरक्षण देने वाले हर छोटे-बड़े नेता, सेलिब्रिटी और सामाजिक कार्यकर्ता की जांच होनी चाहिए।