नाशिक जिले में तीन साल में सामने आए 2,068 एचआईवी पीड़ित
- Written By: अमन दुबे
नाशिक : नाशिक जिले (Nashik District) में 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 के बीच 2068 एचआईवी पीड़ित (HIV Victims) सामने आए है। इन तीन सालों में कुल 6 लाख 84 हजार 846 नागरिकों (Citizens) की टेस्ट की गई। एचआईवी पीड़ितों में 121 गर्भवती महिला (Pregnant Women) शामिल है। इसमें से दो नवजात बच्चे (Newborn Children) एचआईवी पीड़ित है। नाशिक जिले में 2005 में 11 हजार 989 नागरिकों की टेस्ट करने के बाद 733 नागरिक एचआईवी पीड़ित होने की बात सामने आई थी। इसके बाद नियमित स्वास्थ्य जांच (Regular Health Checkups), एचआईवी को लेकर जनजागृति, समुपदेशन आदि के माध्यम से जिले के एचआईवी पीड़ितों की संख्या 6.11 से 0.30 तक पहुंची। एचआईवी पीड़ितों की संख्या कम करने के साथ एचआईवी पीड़ितों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जिले के स्वास्थ्य यंत्रणा सतर्क है। इसके लिए जिला सरकारी अस्पताल, उप जिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (Health Centres) के माध्यम से नागरिकों की टेस्ट की जाती है।
एचआईवी पीड़ितों की खोज करने के साथ उनमें जनजागृति के लिए कई स्वयंसेवी संस्था कार्यरत है। उनके माध्यम से देह व्यापार करने वाली महिलाएं, ट्रक चालक, समलिंगी और असुरक्षित लैंगिक संबंध रखने वाले, स्थलांतरित कामगारों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जाती है। गर्भवती महिला के माध्यम से नवजात बच्चे को एचआईवी न हो इसलिए गर्भवती महिलाओं की टेस्ट की जाती है। इसके तहत 2019 में 1 लाख 71 हजार 720 नागरिकों की टेस्ट की गई, जिसमें 49 गर्भवती महिलाएं एचआईवी पीड़ित होने की बात सामने आई। 2020 में 1 लाख 35 हजार 46 नागरिकों की टेस्ट की गई, जिसमें 35 गर्भवती महिलाओं को एचआईवी होने की बात सामने आई। 2021 में 1 लाख 51 हजार 944 नागरिकों की जांच की गई, जिसमें 37 गर्भवती महिलाएं एचआईवी पीड़ित पाई गई। इन गर्भवती महिलाओं से उनके नवजात बच्चों को एचआईवी न हो इसलिए गर्भवती महिलाओं पर उपचार किए जाते है। इसलिए केवल दो बच्चों को ही एचआयवी हो पाया।
इससे होता है एचआईवी
असुरक्षित शरीर संबंध, एक ही इंजेक्शन का कई नागरिकों पर उपयोग करना, अमली पदार्थ सेवन करने के बाद होने वाले असुरक्षित संबंध आदि से एचआईवी होता है। सही उपचार न करने पर गर्भवती के नवजात बच्चे को भी एचआईवी हो सकता है। एचआईवी पीड़ितों का खून अन्य व्यक्ति को देने पर एचआईवी होने की संभावना होती है। परंतु सही उपचार लेने के बाद एचआईवी पीड़ितों को जान का खतरा नहीं होता है।
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किसी को भी एचआईवी का संदेह होने पर टेस्ट करना आवश्यक है। एचआईवी होने की बात सामने आने पर उपचार शुरू किए जाते है, अन्य व्यक्तियों को एचआईवी का संक्रमण न हो इसलिए सावधानी कैसे बरते? इस बारे में मार्गदर्शन किया जाता है। एचआईवी पीड़ितों ने नियमित उपचार, दवा और सही आहार लेने पर उनकी आयु बढ़ती है। : योगेश परदेशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला एड्स नियंत्रण और प्रतिबंध पथक।
