Nashik Omkar Pawar Complaint( Source: Social Media )
Nashik Omkar Pawar Complaint: नासिक जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ओंकार निलम मधुकर पवार की कार्यप्रणाली को लेकर नई दिल्ली स्थित डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) में की गई शिकायत पूरी तरह आधारहीन है।
जिला परिषद प्रशासन ने मामले की तारीखवार विस्तृत जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार और पारदर्शी रही है। त्र्यंबकेश्वर तहसील के वाढोली निवासी निलेश भावसार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि फर्जी रिपोर्ट के आधार पर मामले का निपटारा किया गया। प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर देरी और लापरवाही बरती गई। पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद अधिकारियों ने उनकी अनदेखी की।
प्रशासन ने संपत्ति क्रमांक 106 (पूर्व क्रमांक 306) से संबंधित जांच का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत किया है, जो इस प्रकार है-
21 जनवरी 2026: मुख्य कार्यकारी अधिकारी के आदेश पर मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच समिति कर गठन किया गया।
25 फरवरी 2026: समिति ने विस्तृत जांच के बाद अपनी आधिकारिक रिपोर्ट तैयार की।
06 मार्च 2026: यह रिपोर्ट जिला परिषद कार्यालय की प्राप्त हुई।
13 मार्च 2026: रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (ग्रामपंचायत) को आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ग्रामपंचायत नमूना क्रमांक 08 के अभिलेखों में अनियमितताएं पाई गई, इसके लिए तत्कालीन ग्रामसेवक युवराज ठाकरे को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, नियमविरुद्ध दर्ज किए गए नाम पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं, इसलिए नए आदेश की आवश्यकता नहीं है।
प्रशासन ने जानकारी दी है कि रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर संबंधित दी तत्कालीन ग्रामपंचायत अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
यह भी पढ़ें:-गर्मी बढ़ते ही नासिक के ग्रामीण इलाकों में जल संकट की आहट, कई गांवों के लिए टैंकर की मांग
नासिक जिला परिषद का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की गई है, अतः सीईओ ओंकार पवार के खिलाफ लगाए गए लापरवाही के आरोप पूरी तरह तथ्यहीन है।