

Nanded Elevated Bridge Collapse Video: महाराष्ट्र में बुनियादी ढांचे और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। अभी मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट में लैंडस्लाइड का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और नए हादसे ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ सरकार इन घटनाओं को राजनीति और प्राकृतिक करार दे रही है, वहीं दूसरी तरफ बिना किसी बारिश के पुलों का ताश के पत्तों की तरह ढहना कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है।
ताजा मामला महाराष्ट्र के नांदेड़ का है, जहां विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का एक और नमूना देखने को मिला। नांदेड़-लातूर हाईवे पर विष्णुपुरी स्थित एक नवनिर्मित एलिवेटेड ब्रिज का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। चौंकाने वाली बात यह है कि पुल के गिरने के समय न तो कोई भारी बारिश हो रही थी और न ही कोई तूफान आया था। बिना किसी बाहरी दबाव या प्राकृतिक आपदा के, महज एक साल पहले बना पुल अगर अचानक गिर जाए, तो यह सीधे तौर पर घटिया निर्माण और बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार का प्रमाण है।
राहत की बात यह रही कि जिस समय पुल का हिस्सा नीचे गिरा, वहां से कोई बड़ा वाहन नहीं गुजर रहा था, अन्यथा भारी जान-माल का नुकसान हो सकता था। हालांकि, इस हादसे में दो लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। नांदेड़-तुलजापूर-बुटीबोरी राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए इस हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों में जबरदस्त आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि यह पुल महज साल भर पहले बनकर तैयार हुआ था और इतनी जल्दी इसका ढह जाना अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत को दर्शाता है।
इस हादसे ने विपक्षी नेताओं को सरकार पर हमला करने का एक और मौका दे दिया है। हाल ही में राज ठाकरे ने राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता पर कड़ा प्रहार किया था। उन्होंने मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए कहा था कि जो प्रोजेक्ट 1 मई को शुरू हुआ, वह 60-65 दिनों के भीतर ही जवाब देने लगा है। वहां टनल से पानी रिस रहा है और पिलर गिर रहे हैं।
राज ठाकरे ने बेहद गंभीर आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र में नए ठेकेदारों को काम पाने के लिए लगभग 56% तक कमीशन देना पड़ता है। जब काम का आधे से अधिक हिस्सा कमीशन में चला जाएगा, तो निर्माण केवल 44% बजट में होगा, जिसके नतीजे नांदेड़ जैसे हादसों के रूप में सामने आते हैं।