सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बाद नागपुर जिला परिषद चुनाव का रास्ता साफ, कांग्रेस-BJP में महामुकाबला

Nagpur ZP Election: SC से जिला परिषद चुनावों को हरी झंडी मिलते ही नागपुर समेत विदर्भ में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। 21 महीने बाद प्रशासक राज खत्म होने की उम्मीद पार्टियों में कड़ी टक्कर तय है।
Supreme Court ZP Election Maharashtra
नागपुर जिला परिषदसोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • महाराष्ट्र की 20 ZP और उनसे संबंधित पंचायत समितियों के चुनाव को लेकर हलचल तेज हुई है।

  • SC के निर्देशों के बाद 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा के भीतर चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

  • नागपुर ZP में करीब 21 महीने से प्रशासक राज चल रहा है।

  • नागपुर ZP की 57 सीटों में पिछले चुनाव में कांग्रेस को 32 और भाजपा को 14 सीटें मिली थीं।

Supreme Court ZP Election Maharashtra: महाराष्ट्र राज्य में 20 जिला मरिषदों और 211 पंचायत समितियों के प्रलंबित चुनावों को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अब नागपुर सहित विदर्भ की सभी जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है।

सुकी ने 50 फीसदी आरक्षण सीमा के भीतर रहते हुए चुनाव कराने के निर्देश दिये हैं। इससे नागपुर जिले में सभी पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई है। स्नातक चुनाव में कांग्रेस की जीत के चलते कांग्रेसी खेमे में विशेष उलसाह देखा जा रहा है।

वैसे भी नागपुर जिला परिषद में कांग्रेस का पूर्ण बहुमत जनवरी 2025 को कालावधि पूर्ण होने के बाद अदालत में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को लेकर मामला चल राहा था जिसके चलते चुनाव लटके हुए थे।

बीते वर्ष 17 जनवरी को ही राज्य के 5 जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त हुआ था और सभी में चुनाव होने का रास्ता अप राहुल गया है। देखना होगा कि चुनाव आयोग अब कत्र चुनाव की घोषणा करता है। नागपुर जेडपी में बीते 21 माह से प्रशासक राज चल रहा है।

मिशन जेडपी दोनों पक्षों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न

यह चुनाव जिप में सत्ताधारी रही कांग्रेस के साथ ही विपक्षी भाजपा के लिए चुनौती भरा होगा। दोनों ही पक्षों के दिग्गज नेताओं के लिए तो यह प्रतिष्हा का प्रश्न ही होगा। जिले के दिग्गज कांग्रेसी नेता व पूर्व मंत्री सुनील केदार ने अपनी रणनीति से लगातार अनेक चुनावों में भाजपा को पटकनी दी।

लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपना उम्मीदवार जिलाया था। जिला परिषद में उनके गुट की एकतरफा सत्ता बैती थी। विपक्ष में बैठी भाजपा काफी कमजोर थी। 57 सीटों वाली जिप में 32 कांग्रेस और 8 राकां यानी मविआ के 40 सदस्य थे। केवल 14 सदस्य भाजपा के चुनकर आए थे। शिवसेना, शेकाप, गोंगपा और निर्दलीय ऐसे 1-1 सदस्य थे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले

विधानसभा चुनाव के बाद लेकिन कमजोर बीजेपी की जिले में वजनदारी बढ़ गई। सुनील केदार की पत्नी अनुजा केदार की विस चुनाव में हार से उनके समर्थकों में निराशा थी तो राकां शरद पवार गुट के अनिल देशमुख के गढ़ में उनके पुत्र सलिल देशमुख की पराजय ने उनके समर्थकों में खलबली मचा दी थी लेकिन स्नातक चुनाव में कांग्रेस-मविआ के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी की जीत ने इस खेमे में उत्साह भरा है।

इस चुनाव में हार के बाद ZP चुनाव में जीत के लिए खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और राज्य मंत्री आशीष जायसवाल पूरा जोर लगाकर जेडपी हथियाने का प्रयास करेंगे, एक ओर जहां कांग्रेस-राकां के सामने सत्ता वापसी तो दूसरी ओर बीजेपी के सामने सत्ता पर कब्जा जमाने की चुनौती होगी।

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अध्यक्ष पद की लाटरी पहले

चुनाव के 6 माह पूर्व ही ग्राम विकास विभाग को जिप अध्यक्ष पद की आरक्षण की लाटरी निकालना जरूरी है, उसके बाद आक्षेप मंगाये जाते हैं और प्रक्रिया के बाद ही चुनाव की घोषणा की जाती है। वर्ष 2019 में नागपुर जेडपी में अध्यक्ष पद एससी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था।

ढाई वर्ष रश्मि बर्वे और उनके बाद मुक्ता कोकडे को यह जिम्मेदारी केदार ने सौंपी थी। बता दें कि 50 फीसदी महिला आरक्षण होने के कारण पिछली बार जो सर्कल ओपन वर्ग में था वह अब महिलाओं के लिए आरक्षित होगा इससे विद्यमान महिला सदस्यों को दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा या नहीं, इस पर भी सभी की नजरें गड़ी होंगी। फिलहाल तो सभी को इस बात का बेसब्री से इंतजार है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कब होती है।

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बैलेट से हो यह चुनाव : कुंदा राऊत

पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष कुंदा राऊत ने कहा कि स्नातक व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव की तरह ही चुनाव आयोग को जिला परिषद और पंचायत समितियों का चुनाव भी बैलेट पेपर के माध्यम से करवाना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी की गलत नीतियों के चलते आज किसान, ग्रामीण जनता त्राहिमाम कर रही है। जनता में सत्ताधारियों के प्रति भारी नाराजगी है जिसका लाभ कांग्रेस-मविआ दलों को मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि चुनाव हुए तो जेडपी में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत से दोबारा वापसी होगी।