नागपुर WCL कोयला विवाद: समाधान के लिए बुलाई थर्ड पार्टी ही निकली धोखेबाज, खरीदार से मिलकर की करोड़ों साजिश
Nagpur Coal Quality: वेकोलि में कोयले की गुणवत्ता जांच को लेकर विवाद सामने आया है। थर्ड पार्टी सैंपलिंग कंपनियों पर अनियमितता के आरोप लगे हैं, जिससे सरकारी कंपनी को करोड़ों के नुकसान की बात सामने आई।
- Written By: अंकिता पटेल
वेकोलि, कोयला गुणवत्ता,सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
Nagpur Western Coalfields Limited: नागपुर वेस्टर्न कोल फील्ड लि. (वेकोलि) में नया खेल चालू है। कोयला देने वाला बोलता है, कोयले की गुणवत्ता अच्छी है। प्रीमियम दो। लेने वाला बोलता है कोयले की गुणवत्ता अच्छी नहीं है, मुझे प्रीमियम रिफंड करो। दोनों के बीच लड़ाई चलती रहती है। इस बीच यह तय होता है कि थर्ड पार्टी सैंपलिंग कराई जाए। थर्ड पार्टी जो भी बोलेगा, उसे मान्य किया जाएगा। अब यह पता चला है कि थर्ड पार्टी कंपनियां भी ‘खेल खेलने लगी हैं। ‘प्रीमियम राशि’ में हाथ मारने के चक्कर में अपना ‘ईमान’ बेच चुकी है।
कोयला लेने वाले से हाथ मिलाकर ‘वेकोलि’ को चूना लगाने लगी है। इसकी खबर वेकोलि प्रबंधन को चल गयी और उन्होंने थर्ड पार्टी कंपनी को ‘प्रतिबंधित’ कर दिया। इतना ही नहीं, वेकोलि ने स्वीकार भी किया है कि थर्ड पार्टी कंपनी की रिपोर्ट के कारण उसे करोड़ों रुपये का चूना भी लग गया है। वेकोलि ने इस संबंध में एक पत्र कोल इंडिया लि. (सीआईएल) को भी भेजा है, जिसमें यह स्वीकार किया गया है।
कोयले की गुणवत्ता को लेकर लड़ाई काफी पुरानी है। वेकोलि और कोयला लेने वालों के बीच दरों को लेकर मारा-मारी होती ही रहती है। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए ही थर्ड पार्टी सैंपलिंग का मार्ग निकाला गया था लेकिन थर्ड पार्टी सैंपलिंग भी मजाक बन गया और कंपनियों के साथ मिलकर सरकारी कंपनी को चूना लगाने का काम करने लगे।
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नुकसान का अंतर अलग
सूत्रों ने बताया कि वैसे तो वेकोलि ने अपने पत्र में 8.47 करोड़ नुकसान की बात कही है, लेकिन सही मायने में जांच होने और परिणाम सामने आने पर यह नुकसान 150 करोड़ से अधिक का हो सकता है।
वेकोलि ने क्वालिटी सर्विस एड सोल्यूशन प्राइवेट लि. (क्यूएसएस) नामक कंपनी को थर्ड पार्टी सैंपलिंग की जिम्मेदारी सौंपी थी। कंपनी 3 वर्षों से सैंपलिंग कर रही है। जब भी किसी ग्राहक से गुणवत्ता को लेकर विवाद होता था, तो क्यूएसएस को सैपल दिया जाता था और रिपोर्ट मांगी जाती थी।
क्यूएसएस की रिपोर्ट हमेशा ही कंपनियों के पक्ष में आती थी क्योंकि दोनों के बीच मिलीभगत होती थी। इस पर वेकोलि के कुछ अधिकारियों को संदेह हुआ और निगरानी की जाने लगी।
निगरानी के बाद पता चला कि क्यूएसएस की साठगांठ निजी कंपनियों के साथ है और उनके कहने पर ही रिपोर्ट बनाई जा रही है। इससे कंपनियों को लाभ होता था और वेकोलि को अतिरिक्त भुगतान करने को मजबूर होना पड़ता था।
क्या सीआईएल करेगा ‘ब्लैकलिस्ट’
अब जबकि वेकोलि में क्यूएसएस का ‘झोल’ सामने आ गया है। सवाल यह उठता है कि संपूर्ण कोल इंडिया के लिए काम करने वाली कंपनी को ‘ब्लैकलिस्ट’ किया जाएगा या फिर अन्य कंपनियों में यवावत कार्य को सुचारु रखा जाएगा। जानकारों की मानें तो कंपनी पूरे कोल इंडिया में इसी प्रकार का रिपोर्ट दे रही है। स्पष्ट है जांच होने पर उसका खुलासा भी होगा। इसलिए कयास यह लगाया जा रहा है कि कंपनी पर ‘कोल इंडिया’ भी गाज गिराएगा।
कोयला व्यापारी ही कर रहे ‘क्वालिटी टेस्टिंग’
इस मुद्दे में सबसे मजेदार बात यह कि गुजरात के एक बड़े कोयला कारोबारी की कंपनी को ही क्वालिटी टेस्टिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मालिक खुद ही बड़ा कारोबारी है, बड़े कोयला व्यापारी उससे जुड़े है। ऐसे में कंपनी हमेशा ही कारोचारियों के पक्ष में ही खड़ी रहती है। पहुंच की बदौलत ही वेकोलि सहित कोल इंडिया में कंपनी ने कांट्रैक्ट हासिल किया है। मामला उजागर होने के बाद क्या कदम उठाये जाते है, इस पर सभी की नजर टिकी है।
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वेकोलि के ही रिटायर्ड लोग
सूत्रों की माने तो क्यूएसएस में वेस्टर्न कोल फील्ड लि. (वेकोलि) से उच्च पदों पर रिटायर्ड हुए लोग है। कंपनी ने जानबूझ कर इन्हें नियुक्त्ति दी थी ताकि वे ‘घर के भेदिए’ के रूप में काम कर सके, संपूर्ण जीवन वेकोलि के लिए कार्य करने वाले रिटायर्ड व्यक्तियों के पास वेकोलि का पूरा कच्चा चिट्ठा था, कमियों की जानकारी थी और वे ही ‘चूना’ लगाने में सबसे बड़े मददगार साबित हुए।
कंपनी से वसूली कैसे
केवल वेकोलि में गलत रिपोर्ट देकर 150 करोड़ से अधिक का चूना लगाने वाले क्यूएसएस से सरकार वसूली कैसे करेगी, यह भी एक ज्वलंत प्रश्न है। वेकोलि ने कंपनी के खिलाफ गिट्टीखदान थाने में 30 अप्रैल को एफआईआर भी दर्ज करा दी है। क्या कंपनी का बैंक गारंटी जब्त किया जाएगा। सिक्योरिटी डिपाजिट जब्त होगा। दोषी पाए जाने वाले निदेशकों से पैसे की वसूली हो पाएगी। सभी की नजर इसी पर टिकी हुई है।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से नीरज नंदन की रिपोर्ट
