गड़‌चिरोली: नाना पटोले के नाम व लेटरपैड का खेल, घोटाले की रिपोर्ट तैयार; पर फर्जीवाड़ा करने वाला अब भी बेनकाब

Gadchiroli Paddy Procurement Scam: गड़चिरोली के धान खरीदी घोटाले से जुड़े मामले में नाना पटोले के नाम, लेटरपैड व हस्ताक्षर के कथित दुरुपयोग को लेकर सवाल उठ रहे है। अभी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं है।
Gadchiroli: Scheme involving Nana Patole's name and letterhead; scam report ready, yet the perpetrator remains unmasked.
धान खरीदी घोटाला, गड़चिरोली, नाना पटोले, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Gadchiroli Document Fraud: गड़‌चिरोली जिले में सरकारी धान खरीदी घोटाले से जुड़े मामलों में कई नामचीन राइस मिलर्स की जांच रिपोर्ट शासन के पास जमा होने के बावजूद, साकोली के विधायक तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले के नाम, लेटरपैड और हस्ताक्षर के कथित दुरुपयोग का मामला अब भी रहस्य बना हुआ है। इस मामले की गहन जांच कर दोषी व्यक्ति का नाम सामने लाया जाएगा या नहीं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

साथ ही यह चर्चा भी तेज है कि स्वयं नाना पाटोले इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं। जिले के अनेक राइस मिलों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का उद्घाटन नाना पटोले के हाथों हुआ था। उन्होंने कई अवसरों पर राइस मिलर्स और उद्यमियों को कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा भी दिलाया था। विभिन्न कार्यक्रमों में राइस मिलर्स द्वारा उन्हें खुलकर सहयोग दिए जाने की भी चर्चा रही है।

फर्जी पत्र प्रकरण में कार्रवाई पर सवाल, दोषियों की पहचान की मांग तेज

शिकायत दर्ज नहीं की गई जानकारी के अनुसार इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा है कि यह काम किसी करीबी व्यक्ति द्वारा किए जाने के कारण मामले को अधिक आगे नहीं बढ़ाया गया।

जिले में यह भी चर्चा है कि देसाईगंज क्षेत्र के एक प्रभावशाली राइस मिलर्स परिवार से जुड़े व्यक्ति का नाम इस मामले में लिया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नागरिकों का कहना है कि यदि इस तरह फर्जी पत्र तैयार करने वाले व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की गई।

जांच की मांग को लेकर उठे सवाल

अचानक ऐसा क्या हुआ कि नाना पाटोले ने सरकारी धान खरीदी में राइस मिलर्स द्वारा कथित घोटाले का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा में जांच की मांग कर दी? इतना ही नहीं, उन्होंने संबंधित विभाग के माध्यम से कई राइस मिलों और गोदामों की जांच भी शुरू करवाई, लेकिन इसी दौरान उनके लेटरपैड पर, उनके हस्ताक्षर सहित, शिकायत वापस लेने संबंधी एक पत्र संबंधित विभाग को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई। नाना पटोले ने बाद में स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी शिकायत वापस नहीं ली है। यदि यह दावा सही है, तो फिर उनके लेटरपैड और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किसने और कैसे किया। इसकी गंभीर जांच होना आवश्यक था।

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