

Nagpur Municipal Corporation Water Supply: नागपुर शहर में सुधार और दुरुस्ती के नाम पर आए दिन जलापूर्ति को लेकर हो रहे शटडाउन के चलते अब जनता में रोष पनपता जा रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 6 अक्टूबर को कुछ हिस्सों में 36 घंटे तो कुछ हिस्सों में 12 घंटे का शडडाउन लिया, किंतु 72 घंटे बीत जाने के बाद भी इन इलाकों में जलापूर्ति सुचारू नहीं हो पाई।
पूरे शहर में ही हाहाकार की स्थिति के बावजूद मनपा की लचर कार्यप्रणाली का आलम यह रहा कि किसी भी अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली। कई इलाकों में लोगों को मजबूरी में घर तक छोड़ना पड़ गया है। इतना ही नहीं कई घरों में लोगों का टायलेट जाना मुश्किल हो गया है, क्योंकि पानी नहीं है। जलसंकट की ऐसी स्थिति को लेकर कोई भी अधिकारी कार्यालय में गंभीर दिखाई नहीं दिया।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा रही कि स्नातक सीट के चुनाव को लेकर आचार संहिता होने के कारण न तो पदाधिकारियों की ओर से किसी तरह की कार्यवाही की गई और न ही पदाधिकारियों की अनुपस्थिति में अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया।
जो भी हो शहर के अधिकांश हिस्सों में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह रहे कि सिविल लाइंस, सीताबर्डी और म्हालगीनगर जैसे इलाकों में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जानकारों की मानें तो आचार संहिता में अति आवश्यक कार्य के लिए वैसे भी मंजूरी प्रदान है। ऐसे में जनता को पानी उपलब्ध कराने से अति आवश्यक कार्य और क्या हो सकता है किंतु आचार संहिता के नाम पर पदाधिकारियों ने भी सिटी के जलसंकट को लेकर जनता का आक्रोश अनसुना कर दिया, जिसका हश्र यह रहा कि जनता गुरुवार को पूरी तरह से भगवान भरोसे हो गई।
जानकारों के अनुसार मनपा में सत्ता स्थापित होने के बाद से अधिकारी केवल पदाधिकारियों द्वारा आने वाले निर्देशों पर काम कर रहे हैं, अन्यथा किसी भी समस्या या इस तरह के औचक उत्पन्न स्थिति पर भी संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार मनपा में जलापूर्ति की पूरी यंत्रणा निजी कम्पनी के हाथों में सौंपने के बाद से नाम के लिए जलापूर्ति विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मनपा के अधिकारी फिलहाल चांदी काट रहे हैं। न तो किसी तरह की जानकारी दी जा रही है और न ही किसी समस्या को हल करने की दिशा में गंभीरता से काम करते दिखाई दे रहे है।
आश्चर्यजनक यह कि जलापूर्ति विभाग में किसी वास्तविकता को जानने के लिए अधिकारी से पूछने पर दूसरे वरिष्ठ महिला अधिकारी के पास अधिकार होने का हवाला देकर मुसीबत को टाल दिया जा रहा है। महिला वरिष्ठ अधिकारी के पास जाने पर सीधे कार्यकारी अभियंता के पास भेजा के बावजूद दोनों अधिकारियों में समन्वय तक रहा है। इस तरह से एक ही कार्यालय कक्ष में होने दिखाई नहीं देता है।
सूत्रों की मानें तो सिटी में आम तौर पर किसी न किसी क्षेत्र में बदस्तूर जारी जलसंकट को अब सामान्य रूप देने की कवायद मनपा अधिकारियों की ओर से हो रही है। यही कारण है कि जल वितरण की जिम्मेदारी संभाल रही ओसीडब्ल्यू कम्पनी की कार्यप्रणाली पर भी अधिकारियों का अंकुश नहीं रहा है।
हालांकि इस तरह की कार्यप्रणाली को लेकर मनपा की सभा में कई बार पार्षदों की ओर से भी तीव्र नाराजगी और खेद जताया गया, किंतु अब तक किसी की जिम्मेदारी वास्तविक रूप में तय नहीं की गई, यही कारण है कि निजी कम्पनी भी बेखौफ होती जा रही है।
समय रहते यदि अंकुश नहीं लगाया गया तो निकट भविष्य में सिटी को भारी जलसंकट से गुजरना पड़ सकता है, जिसकी आहट राज्य सरकार की ओर से भी दी गई है।
पेंच-4 जल शुद्धिकरण केंद्र में पाइपलाइन स्थानांतरण के लिए बंद की गई जलापूर्ति निर्धारित 36 घंटे बाद भी शुरू नहीं हो सकी।
विश्व बैंक प्रकल्प की ओर से समय पर काम नहीं किए जाने के चलते ही जलापूर्ति बंद रखने की अवधि बढ़ानी पड़ी। इससे शहर के प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
नागपुर मनपा ने शुक्रवार से जलापूर्ति चरणबद्ध तरीके से सामान्य करने का प्रयास शुरू करने की जानकारी दी है।
महापौर नीता ठाकरे ने संबंधित अधिकारियों को काम में तेजी लाने और जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार देर शाम उपमहापौर लीला हाथीबेड ने मौके पर पहुंचकर चल रहे कार्य का निरीक्षण किया।