

Nagpur Vidarbha Tiger Capital: नागपुर विदर्भ को यू ही 'टाइगर कैपिटल' नहीं कहा जाता। टाइगर को देखने का जहां अपना सुखद आनंद है वहीं टाइगर के कारण विदर्भ के कोने-कोने में 'पैसे' भी पहुंच रहे हैं। ग्रामीण जीवनशैली को बदलने में टाइगर बड़ा योगदान निभा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार टाइगर से विदर्भ क्षेत्र में लगभग 1,500 करोड़ रुपये की आय हो रही है। इसमें टिकट, रहने-खाने से लेकर साइट सीन तक शामिल है।
टाइगर प्रोजेक्टों के आसपास हजारों करोड़ रुपये का निवेश भी आकर्षित हो चुका है और हर वर्ष लगभग 150-200 करोड़ रुपये का निवेश आ भी रहा है। ताडोबा में ही टाइगर देखने के लिए लोग साल में 70-80 करोड़ टिकट पर खर्च करते हैं।
बाघ राजधानी के प्रवेश द्वार के रूप में ख्याति प्राप्त नागपुर के आसपास फैले 15 बाघ अभ्यारण्य (टाइगर रिजर्व) और करोड़ों का कारोबार विदर्भ की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे रहा है। देश में बाघों के सबसे बड़े आश्रय स्थल माने जाने वाले इस क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन के कारण अकेले एक सीजन में 1,500 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा है। इसमें सबसे ज्यादा खर्च अंधेरी-ताडोबा में हो रहा है।
मध्य भारत के पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और महाराष्ट्र का गौरव माना जाने वाला ताडोबा-अंधारी जैसे प्रमुख बाघ अभ्यारण्यों में बाघों की संख्या काफी उल्लेखनीय है। पर्यटकों की इस पक्की पसंद और वन विभाग के बेहतरीन प्रबंधन के कारण मानसून के महीनों को छोड़कर बाकी के 8 महीनों में पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ से पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है।
इस बढ़ते पर्यटन से न केवल सरकार को राजस्व मिल रहा है बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को गाइड, रिसॉर्ट प्रबंधन, वाहन चालक और हस्तशिल्प बिक्री के माध्यम से रोजगार की गारंटी मिल रही है जिससे उनके जीवन में आमूल-चूल सकारात्मक बदलाव आया है।
नागपुर विदर्भ को यू ही 'टाइगर कैपिटल जिन ग्रामीण इलाकों में पहले लोग दूध वाले से ताजा दूध लेने पर निर्भर हुआ करते थे वहां अब आधुनिक बाजार व्यवस्था के तहत पैकेटबंद दूध पहुंचने लगा है। जहां लोग सुबह शौच के लिए बाहर जाते थे वहां पर अत्याधुनिक टॉयलेट तक बन रहे हैं। कमरे ऐसे-ऐसे बने हैं जो शहरों को मात देते हैं। टाइगर को देखने लिए पर्यटक रिसॉर्ट्स में एक रात रहने पर 25,000- 30,000 रुपये तक खर्च कर डालते हैं। साधारण से साधारण होटलों का किराया 2.500- 4,500 रुपये के बीच पहुंच गया है।
वर्ष 2022 की आधिकारिक राष्ट्रीय बाघ गणना के अनुसार महाराष्ट्र में 444 बाघ दर्ज किए गए थे। इनमें से लगभग 95 प्रतिशत बाघ विदर्भ के घने जंगलों में पाए जाते हैं। सह्याद्री टाइगर रिजर्व में गिने-चुने बाध ही है। मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड के बाद बाघों की संख्या के मामले में पूरे देश में महाराष्ट्र चौथे स्थान पर है। वर्तमान में वर्ष 2026 की बाघ गणना की जा रही है जिसमें बाधों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।
पैच हो या फिर ताडोबा, बोर या नागझिरा, कराडला सभी जगह एक से बढ़कर एक रिसॉर्ट्स आ चुके हैं। छोटे-छोटे रिसॉर्ट्स भी हैं तो लग्जरी रिसॉर्ट्स की संख्या कम नहीं है। 10, 20, 30 हजार रुपये एक दिन में खर्च करना सामान्य सी बात हो गई है।
पर्यटकों की संख्या देखकर भी अंदाज लगाया जा सकता है कि इकोनॉमी को कैसे बूस्ट मिल रहा है। एक-एक रिसॉर्ट्स में 10 से 50 युवाओं को रोजगार मिला हुआ है, ख्वासा और ताडोबा इसके प्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में हर साल पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बाध सहित जैव विविधता के निश्चित दर्शन होने के कारण देश-विदेश के पर्यटक लगातार यहां आते हैं। इसके चलते इस टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है जिससे वन और वन्यजीव संरक्षण में बड़ा योगदान मिला है।
डॉ. प्रभुनाथ शुक्ल, क्षेत्र संचालक, ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व