
मिहान का कर दिया बंटाढार (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नागपुर: विदर्भ के औद्योगिक विकास व रोजगार की समस्या के निराकरण के बड़े-बड़े दावे करने के बावजूद आज तक मिहान का पूर्ण विकास नहीं किया जा सका है। हालत यह है कि वर्ष 2016 के बाद बीते 8 वर्षों में मिहान में कोई बड़ा निवेश नहीं आया और न ही उद्योग। मिहान के कुल 3,700 एकड़ जमीन में से अब तक केवल लगभग 900 एकड़ जमीन ही उद्योगों को आवंटिक की गई है, उसमें भी अधिकतर जमीन लेने वाली कंपनियों ने अपना उद्योग शुरू नहीं किया है।
मिहान प्रकल्पग्रस्त शेतकरी समिति अध्यक्ष बाबा डवरे ने आरोप लगाया है कि एमएडीसी के अधिकारियों की मनमानी ने मिहान का बंटाढार कर दिया है। एमएडीसी के पदसिद्ध अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं लेकिन बीते 4-5 वर्ष में एक भी सीएम ने प्रकल्प को प्रत्यक्ष भेंट नहीं दी। मिहान के जनक नागपुर के नेता तो राज्य के अस्थिर राजनीतिक घटनाक्रम में लगे हुए हैं इसलिए समय नहीं दे पा रहे हैं।
यही कारण है कि अधिकारियों की मनमानी चल रही है। ये अधिकारी यहां के बड़े नेता को मिहान में निवेश और रोजगार संबंधी झूठी जानकारी देकर अंधेरे में रख रहे हैं। प्रकल्प में क्षेत्र का अनुभव न रखने वाले रिटायर्ड अधिकारियों की 3-3 महीने में कॉन्ट्रैक्ट बेस पर नियुक्ति की जा रही है।
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अनेक बड़ी कंपनियों ने एकड़ों में जमीनें कौड़ी के मोल ले ली है और सिर्फ 5 से 10 फीसदी जमीन का उपयोग कर रहे हैं। 2016 में बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी को मिहान सेज के बाहर की महंगी औद्योगिक 234 एकड़ जमीन स्थानीय लोगों को रोजगार देने व किसानों की उपज को अच्छा भाव मिले इस उद्देश्य से अत्यंत कम भाव में दी गई। बाबा ने 2 वर्ष में देश का सबसे बड़ा फूड पार्क शुरू करने की घोषणा की थी लेकिन 8 वर्ष बीत गए फूड पार्क की जगह केवल आटा चक्की बीते एक वर्ष से शुरू हुई है जिसमें 50-100 लोग काम करते हैं। पतंजलि के फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट की करोड़ों की मशीनें व फैक्टरी शेड कबाड़ होते पड़ी है।
लगभग 12,000 करोड़ की लागत से नागपुर मेट्रो रेल का पहला चरण शुरू किया गया। मिहान स्थित उद्योगों में काम करने वालों के लिए यह उपयोगी होगा इस दृष्टि से मेट्रो का नियोजन किया गया था लेकिन मिहान में उद्योग व रोजगान नहीं बढ़ने से अप्रत्यक्ष रूप से मेट्रो को भी इसका फटका लग रहा है। डवरे ने आरोप लगाया कि नागपुर व विदर्भ के युवाओं को जो सपना दिखाया गया था वह पूरा करने में सरकार, नेता, अधिकारी बुरी तरह असफल रहे हैं।
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आज मिहान में मार्केटिंग मैनेजर का पद रिक्त है और उसका प्रभार भी गैरअनुभवी मुख्य अधिकारी को सौंपा गया है। निवेश करने के इच्छुक उद्योगजों को मिहान कार्यालय के चक्कर पर चक्कर लगाने पड़ते हैं। अधिकारियों का कोई प्रतिसाद ही नहीं मिलता। प्रकरण मुंबई में प्रलंबित होने की बात कहकर ये पल्ला झाड़ लेते हैं। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर भी समय पर जानकारी नहीं दी जाती।
प्रकल्पग्रस्त शेतकरी समिति अध्यक्ष बाबा डवरे ने चेतावनी दी है कि अपनी मनमानी के चलते सरकार व विदर्भ का नुकसान करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। कार्रवाई नहीं किये जाने पर समिति की ओर से बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।






