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नागपुर से उपराष्ट्रपति का बड़ा संदेश, युवा संसद में सीपी राधाकृष्णन ने कहा- अपनी भाषा में बोलना मौलिकता

CP Radhakrishnan News: उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने नागपुर में युवा संसद को संबोधित करते हुए वैश्विक युद्ध संकट पर चिंता जताई। उन्होंने 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य पर भी अपनी बात रखी।

  • Written By: आकाश मसने
Updated On: Mar 21, 2026 | 04:19 PM

नागपुर में आयोजित भारतीय युवा संसद कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत करते अतिथि (सोर्स: सोशल मीडिया)

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Vice President CP Radhakrishnan Nagpur Speech: नागपुर के रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र का भव्य आगाज़ हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और भारत की भाषाई शक्ति पर अपने विचार साझा किए।

उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को दुनिया भर में मंडरा रहे युद्ध के बादलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। नागपुर के रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हथियारों की होड़ के बीच केवल ‘संवाद’ ही शांति और समाधान का एकमात्र रास्ता है।

मातृभाषा क्षेत्रीयता नहीं, मौलिकता का प्रतीक

इस चार दिवसीय युवा संसद का मुख्य विषय ‘भारतीय भाषाएं और विकसित भारत-2047’ रखा गया है। भाषा के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि अपनी मातृभाषा में बात करना किसी व्यक्ति को क्षेत्रीय नहीं बनाता, बल्कि यह उसकी मौलिकता का परिचय देता है।उन्होंने एक बेहद मार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हर व्यक्ति अपनी मां से प्रेम करता है, वैसे ही अपनी मातृभाषा और धर्म से प्रेम करना स्वाभाविक है। लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि हम दूसरे की मां या भाषा का सम्मान न करें। भारत की भाषाई विविधता ही हमारी सांस्कृतिक समरसता की पहचान है।

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Vice President Shri C. P. Radhakrishnan, graced the 29th National Session of the Indian Youth Parliament at Maharshi Vyas Sabhagrah in Nagpur, Maharashtra today. Appreciating the Indian Youth Parliament National Trust for its work over more than two decades, he said the… pic.twitter.com/TxMEcS9o75 — Vice-President of India (@VPIndia) March 21, 2026

तमिल और गुजराती में संविधान का हुआ अनुवाद

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए बताया कि केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए अभूतपूर्व कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में संविधान का अनुवाद तमिल और गुजराती में जारी किया गया है। इसके अलावा, पहली बार भारतीय संविधान डोगरी और संथाली जैसी भाषाओं में भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि देश का हर नागरिक अपने अधिकारों को अपनी भाषा में समझ सके।

Live – Vice President Shri C. P. Radhakrishnan’s address at the 29th National Session of Indian Youth Parliament at Maharishi Vyas Sabhagruh, Nagpur, Maharashtra. https://t.co/rR2SLrHmg9 — Vice-President of India (@VPIndia) March 21, 2026

उपराष्ट्रपति ने संसद के अनुभवों को साझा किया

राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए राधाकृष्णन ने वर्तमान बजट सत्र का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सदन में रचनात्मक चर्चा देखना सुखद है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन चर्चा का उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि अंतिम निष्कर्ष और समाधान होना चाहिए।

यह भी पढ़ें:- विश्व गौरैया दिवस: कंक्रीट के जंगलों में फिर चहकेगी गौरैया, नवी मुंबई के युवाओं ने पेश की मिसाल

उन्होंने उपस्थित छात्रों को ‘अमृत पीढ़ी’ के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने युवाओं को सचेत किया कि विकसित भारत का सपना ‘उधार के विचारों’ से पूरा नहीं होगा। इसके लिए हमें अपनी जड़ों से जुड़ना होगा और अपनी पहचान के साथ दुनिया का नेतृत्व करना होगा।

दुनिया की नजरें भारत पर

संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा, “आज पूरी दुनिया भारत को बहुत गंभीरता से देख रही है और भारत अपनी युवा शक्ति की ओर देख रहा है। आपको उन मूल्यों को सीखना होगा जो एक सशक्त और जीवंत राष्ट्र का निर्माण करते हैं।”

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Published On: Mar 21, 2026 | 04:19 PM

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