कपास उत्पादन पर वीआईए की चिंता, वैश्विक औसत से काफी पीछे भारत; उत्पादकता बढ़ाना आर्थिक जरूरत बताया
Nagpur Cotton Productivity Issue: वीआईए ने कपास आपूर्ति और व्यापार नीति पर सीआईटीआई की रिपोर्ट का समर्थन किया। रिपोर्ट में भारत की कम कपास उत्पादकता को आर्थिक चुनौती बताया गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
वीआईए नागपुर, कपास उत्पादन संकट,(सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Cotton Trade Policy: नागपुर विदर्भइंडस्ट्रीज एसोसिएशन (वीआईए) ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) द्वारा जारी ‘भारत में कपास की आपूर्ति, मूल्य निर्धारण और व्यापार नीति का आर्थिक विश्लेषण’ शीर्षक वाली रिपोर्ट का पुरजोर समर्थन किया है। रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (आईसीएसी) और घेरजी टेक्सटाइल ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से तैयार की गई है।
कम उत्पादकता पर चिंता वीआईए
अध्यक्ष प्रशांत मोहता ने कहा कि रिपोर्ट एक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। भारत में कपास की औसत पैदावार लगभग 450 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है जो 800 किलोग्राम के वैश्विक औसत से काफी कम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्पादकता बढ़ाना अब केवल एक कृषि लक्ष्य नहीं बल्कि एक आर्थिक अनिवार्यता है।
वैश्विक संकट का प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण फरवरी 2026 से उर्वरकों की कीमतों में 40% और कपास व एमएमएफ की कीमतों में 15-30% तक की वृद्धि हुई है। ऐसे में ये सुधार और भी जरूरी हो गए हैं। मोहता ने कहा कि यदि भारत को 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कपड़ा निर्यात का लक्ष्य हासिल करना है तो आयात शुल्क हटाना और घरेलू कीमतों को वैश्विक रुझानों के अनुरूप लाना अनिवार्य है। कपड़ा मंत्रालय से इन सिफारिशों पर तुरंत कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
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प्रमुख सिफारिशें और प्रस्तावित सुधार
बफर स्टॉक: स्थानीय मिलों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगभग 100 लाख गांठों का बफर स्टॉक बनाना।
रणनीतिक रिजर्व: बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए चीन की तर्ज पर 3 महीने का रणनीतिक इन्वेंट्री रिजर्व रखना।
वित्तीय सुधार: ‘कॉटन प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड’ बनाना जिसमें 5% ब्याज सहायता दी जाए और एमएसएमई स्पिनिंग मिलों के लिए कैश क्रेडिट सीमा को बढ़ाकर 9 महीने किया जाए।
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आयात शुल्क वापस लेने की मांग
पीआईए ने रिपोर्ट की उस सिफारिश का समर्थन किया है जिसमें कधयास पर आयात शुल्क वापस लेने की बात कही गई है। मोहता ने बताया कि 2021-22 में लगाया गया यह शुल्क अब भारतीय मिलों के लिए बाधा बन गया है क्योंकि एशिया के हमारे प्रतिस्पधीं देशों को अंतरराष्ट्रीय कयास तक शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त है
