यवतमाल में सीजन के अंत में 8 हजार पार कपास के दाम, किसानों को नहीं मिला बढ़ोतरी का लाभ

यवतमाल में कपास के दाम बढ़कर 8,300 रुपये तक पहुंच गए हैं, लेकिन अधिकांश किसान पहले ही कम दाम में अपनी उपज बेच चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण आई इस तेजी का लाभ व्यापारियों को मिल रहा है।
Yavatmal Cotton Price
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Yavatmal Cotton Price News: सफेद सोना कहे जाने वाले कपास के दाम सीजन के आखिर में तेज़ी से बढ़कर 8,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गए हैं। हालांकि इस बढ़ी हुई कीमत का फायदा कपास उत्पादक किसानों को नहीं मिल पाया, जिससे उनमें नाराज़गी देखी जा रही है। सीजन की शुरुआत में कम दाम और आर्थिक मजबूरी के कारण किसानों ने अपना कपास बेच दिया था। अब जब कीमतें बढ़ी हैं, तब उनके पास बेचने के लिए कपास बचा ही नहीं है।

इस वर्ष सरकारी खरीद प्रक्रिया की जटिलताओं ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। रजिस्ट्रेशन के लिए स्लॉट बुकिंग, बुवाई की जानकारी देना और खरीद में देरी जैसी शर्तों से कई किसान परेशान रहे। इसके चलते उन्हें मजबूरन निजी व्यापारियों को 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से कपास बेचना पड़ा।

जनवरी में दाम में कुछ बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन तब तक अधिकांश किसानों के पास स्टॉक खत्म हो चुका था। पिछले पंद्रह दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव के कारण कपास की कीमतों में बड़ी उछाल आई है। चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से भारतीय कपास की मांग बढ़ने के कारण भाव 8,300 रुपये तक पहुंच गए हैं।

लेकिन इस बढ़ोतरी का लाभ मुख्य रूप से व्यापारी और भारतीय कपास निगम CCI को ही मिलता दिख रहा है। बाक्सकिसान इस आर्थिक लाभ से वंचितवणी तहसील में CCI ने अब तक 4 लाख 9 हजार क्विंटल से अधिक कपास की खरीद की है, जिससे करोड़ों रुपये का कारोबार हुआ है।

इसके बावजूद असली उत्पादक किसान इस आर्थिक लाभ से वंचित रह गए हैं, जिससे उनमें असंतोष है। इस बीच, जहां कपास के दाम में तेजी आई है, वहीं सोने की कीमतों में अस्थिरता देखने को मिल रही है। कपास की बढ़ती कीमतों से बाजार में हलचल जरूर बढ़ी है, लेकिन किसानों की उम्मीदें अब भी अधूरी हैं।

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