5 महीने का इंतजार खत्म! नागपुर यूनिवर्सिटी को मिला नया प्र-उपकुलपति, अखिलेश पेशवे के नाम पर मुहर
Nagpur University: नागपुर विश्वविद्यालय में 5 महीने से खाली प्र-उपकुलपति पद पर अखिलेश पेशवे के नाम पर मुहर लगी। प्रबंधन परिषद की सहमति के बाद प्रस्ताव राज्यपाल कार्यालय भेजा गया।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर विश्वविद्यालय, प्र-उपकुलपति, अखिलेश पेशवे, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur University Pro Vice Chancellor: नागपुर राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में पिछले 5 महीनों से खाली प्र-उपकुलपति के पद पर आखिरकार मुहर लग गई। प्रबंधन परिषद की बैठक में उपकुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर ने धरमपेठ विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य अखिलेश पेशवे के नाम की घोषणा की जिस पर सभी सदस्यों ने सहमति दशति हुए मान्य किया। प्रा. पेशवे डॉ. की नियुक्ति के बाद परीक्षा विभाग की धीमी पड़ी गति को बल मिलने की उम्मीद है।
सोमवार को प्रबंधन परिषद की बैठक आयोजित की गई। इसमें उपकुलपति ने एकमात्र डॉ. पेशवे का नाम रखा। इस पर सभी सदस्यों से सहमति दर्शाई। इसके बाद नाम फाइनल कर राज्यपाल कार्यालय को भेज दिया गया। दरअसल इससे पहले भी प्रबंधन परिषद की एक बैठक नियोजित की गई थी लेकिन कुछ ‘राजनीतिक’ कारणों से ऐन वक्त पर बैठक स्थगित करनी पड़ी।
माना जा रहा था कि उस बैठक में जिस नाम की घोषणा होना था उसे ‘आलाकमान’ की मंजूरी नहीं मिली थी। वैसे प्र-उपकुलपति पद की दौड़ में प्रा. पेशवे के साथ ही स्कूल ऑफ लॉ के निदेशक डॉ. रविशंकर मोर, अधिष्ठाता डॉ. श्याम कोरेटी भी थे लेकिन प्रा. पेशवे के नाम पर ‘उच्च स्तरीय’ मुहर लगी।
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5 माह तक करना पड़ा इंतजार
दरअसल प्र-उपकूलपति का पद उपकुलपति की नियुक्ति तक ही बना रहता है। डॉ. मनाली क्षीरसागर ने दिसंबर 2025 में उपकुलपत्ति पद का कार्यभार संभाला था। इसके बाद प्र-उपकुलपति की नियुक्ति की संभावना जताई जा रही थी लेकिन करीब 3 माह तक नियुक्ति नहीं होने से
प्रक्रिया में देरी को लेकर सवाल उठ रहे थे। प्रा. पेशवे भारतीय शिक्षण मंडल विदर्भ प्रात अध्यक्ष भी है।
भारतीय शिक्षण मंडल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का ही एक वैचारिक और आनुषांगिक संगठन है। शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय सस्कृति और मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए इसकी स्थापना 1969 में की गई थी।
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प्रा. पेशवे ने अपने शैक्षणिक करिअर की शुरुआत आरएस मुंडले धरमपेठ आटर्स, कॉमर्स एंड साइस कॉलेज में अग्रेजी विभागाध्यक्ष के रूप में की। इसके बाद वे एमपी देव स्मृति विज्ञान महाविद्यालय में प्राचार्य पद पर नियुक्त हुए और पिछले 10 क्यों से यह जिम्मेदारी संभाल रहे है।
