भागवत साहब क्या यही है आपका हिंदू राष्ट्र? संघ के गढ़ में उद्धव ठाकरे की ललकार, पूछे तीखे सवाल
Uddhav Thackeray Nagpur Speech: नागपुर में रामरक्षा आंदोलन के दौरान उद्धव ठाकरे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से देश के मौजूदा हालात पर तीखे सवाल पूछे।
- Written By: अनिल सिंह
रामरक्षा आंदोलन में गरजे उद्धव ठाकरे (फोटो क्रेडिट-X)
Uddhav Thackeray On Mohan Bhagwat: अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सत्तापक्ष के खिलाफ अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। ठाकरे समूह के नेतृत्व में पूरे महाराष्ट्र में चलाए जा रहे ‘राम रक्षा’ आंदोलन के तहत उपराजधानी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गढ़ नागपुर में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।
नागपुर के इस मंच से पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने न केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला, बल्कि संघ प्रमुख (सरसंघचालक) डॉ. मोहन भागवत को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करते हुए कई चुभते सवाल पूछे। ठाकरे ने देश के वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या संघ ने इसी तरह के शासन की कल्पना की थी।
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क्या यही है आपका हिंदू राष्ट्र
नागपुर में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि चूंकि वे संघ की मुख्य भूमि पर आए हैं, इसलिए कुछ बुनियादी सवाल पूछना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। ठाकरे ने सीधे संघ प्रमुख को संबोधित करते हुए कहा, “मैं आदरणीय मोहन भागवत साहब से पूछना चाहता हूं कि वर्तमान में भाजपा देश में जिस तरह का तानाशाहीपूर्ण बर्ताव कर रही है, क्या वह सही है? आज विपक्षी दलों को अनैतिक रूप से तोड़ा जा रहा है, संविधान के पन्नों को तार-तार किया जा रहा है और अब तो भगवान के मंदिरों की तिजोरियां भी सुरक्षित नहीं हैं। भागवत साहब, क्या यही वह ‘हिंदू राष्ट्र’ है जिसकी उम्मीद आपने और संघ ने की थी?”
उद्धव ठाकरे ने वर्तमान शासन व्यवस्था को नकारते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष और आम जनता को ऐसा भ्रष्ट हिंदू राष्ट्र कतई मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि असली हिंदू राष्ट्र में ‘राम राज्य’ और ‘शिवशाही’ (छत्रपति शिवाजी महाराज का शासन) के मूल्य होने चाहिए, जहां समाज के सबसे गरीब नागरिक, किसान और असहाय छात्रों को त्वरित न्याय मिले, न कि चंद पूंजीपतियों और बड़े ठेकेदारों को सरकारी संरक्षण प्रदान किया जाए।
चोरों का पेट भरने के लिए नहीं लड़ा संघर्ष
आंदोलन के मंच से युवाओं और छात्रों का मुद्दा उठाते हुए ठाकरे ने संघ प्रमुख के पुराने बयानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “भागवत साहब, आपने पूर्व में कहा था कि हिंदुओं को अपनी आबादी बढ़ाने के लिए दो से तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। लेकिन आज देश में जो युवा पढ़-लिख रहे हैं, उनका भविष्य अंधकार में है। देश में लगातार परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं, जिसके कारण हताश होकर कई होनहार छात्र आत्महत्या करने पर मजबूर हैं। अगर हम इन युवाओं को सुरक्षित भविष्य नहीं दे सकते, तो क्या हम और बच्चे पैदा करके उन्हें इसी तरह व्यवस्था के पैरों तले कुचलने के लिए छोड़ देंगे?”
भाषण के अंतिम चरण में भावुक होते हुए उद्धव ठाकरे ने अपने पिता और हिंदू हृदय सम्राट दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा था, तब पूरी दुनिया के सामने केवल बालासाहेब ठाकरे सीना तानकर खड़े हुए थे और उन्होंने गर्व से कहा था कि यदि यह काम उनके शिवसैनिकों ने किया है तो उन्हें उन पर नाज है। ठाकरे ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि देश के अनगिनत कारसेवकों ने लाठियां-गोलियां खाईं और अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन उनका यह पवित्र वैचारिक संघर्ष आज के इन ‘चोरों’ और भ्रष्ट नेताओं का पेट भरने के लिए बिल्कुल नहीं था।
