टाइगर ट्रांसलोकेशन को मंजूरी (सौजन्य-नवभारत)
Pench Tadoba Tiger Shift: बाघों की बढ़ती संख्या और घट रहे जंगल क्षेत्र के कारण मानव-वन्यजीव टकराव में बढ़ोतरी हुई है। खाने और आवास की तलाश में बाघ रिजर्व से निकलकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। मानव-वन्यजीव टकराव को कम करने के लिए अहम फैसला लिया गया है।
बता दें कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ) ने ताड़ोबा अंधारी टाइगर रिजर्व और पेंच टाइगर रिजर्व एवं आसपास के भू-भाग से बाघों को सह्याद्री बाघ अभयारण्य में स्थानांतरित करने की मंजूरी दे दी है। टाइगर ट्रांसलोकेशन के तहत अगले 5 वर्षों में कुल 8 बाघों को चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरित किया जाएगा।
इससे सह्याद्री टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण और आबादी बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसी के साथ पेंच टाइगर रिजर्व और ताड़ोबा अंधारी टाइगर रिजर्व अंतर्गत बसे गांवों में मानव-वन्यजीव टकराव में काफी हद तक कमी आएगी। पेंच और ताड़ोबा में बाघों की संख्या अधिक है। ऐसे में टाइगर ट्रांसलोकेशन को मंजूरी एक अहम निर्णय साबित होगा।
टाइगर ट्रांसलोकेशन के तहत पहले चरण में 2 उप-वयस्क बाघिनों का चयन किया गया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और महाराष्ट्र वन विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार उक्त 2 बाघिनों में से एक जिसकी पहचान टी20एसएफ2 के रूप में हुई उसे वन विभाग ने ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन अंतर्गत खडसंगी वन क्षेत्र से सफलतापूर्वक पकड़ा।
ताड़ोबा के पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा स्वास्थ्य जांच के बाद पकड़ी गई बाघिन को सह्याद्री बाघ अभयारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया है। ताड़ोबा के फील्ड डायरेक्टर प्रभुनाथ शुक्ला के नेतृत्व में उपनिदेशक (बफर) आनंद रेड्डी, उप वन संरक्षक सचिन शिंदे, सहायक वन संरक्षक एसएस दुबे, अनिरुद्ध धागे और राऊत और उनकी टीम ने बाघिन को पकड़ने में सहयोग किया।
सह्याद्री टाइगर रिजर्व पहुंचने पर वैज्ञानिक अवलोकन के लिए रेडियो कॉलर का उपयोग करके बाघिन की निगरानी की जाएगी। यह पहल सह्याद्री में बाघों की आबादी को बहाल करने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और आनुवंशिक विविधता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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टीएटीआर और एसटीआर के समन्वित प्रयासों से पहली बाघिन का समय पर स्थानांतरण संभव हो सका। सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में बाघिनों को स्थानांतरित करने में हमारी पिछली सफलता टीएटीआर टीम की विशेषज्ञता को दर्शाती है।
– प्रभुनाथ शुक्ला, फील्ड डायरेक्टर, ताड़ोबा
यह स्थानांतरण सह्याद्री की बाघ आबादी को पुनर्जीवित करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मैं ताडोबा और सह्याद्री की टीमों को उनके पेशेवर और वैज्ञानिक कार्यान्वयन के लिए बधाई देता हूं।
– एमएस रेड्डी, मुख्य वाइल्ड लाइफ वॉर्डन