बाघों की मौत के आंकड़ों में झोल! हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान; वन विभाग व NTCA के डेटा में 16 बाघों का अंतर
Maharashtra Tiger Deaths: महाराष्ट्र में बाघों की मौत के आंकड़ों में वन विभाग और एनटीसीए के बीच 16 बाघों का अंतर मिलने पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
- Written By: अंकिता पटेल
वन विभाग, बाघ संरक्षण (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Tiger Mortality Data Discrepancy: नागपुर महाराष्ट्र में बाघों की लगातार हो रहीं मौतों और उनके संरक्षण को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राज्य वन विभाग बाघ और राष्ट्रीय संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा प्रस्तुत किए गए बाघों की मौत के आंकड़ों में 16 बाघों का अंतर पाया गया है। बढ़तों मौतों और इस विसंगति को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया। इस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण हलफनामा के साथ पेश करने के आदेश दिए।
दूसरे स्थान पर पहुंचा राज्य
बढ़ते व्याघ्र मृत्यु दर के कारण महाराष्ट्र देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने राज्य के वन विभाग और एनटीसीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सुनवाई के दौरान ‘अदालत मित्र’ चैतन्य ध्रुव ने अदालत के ध्यान में यह बात लाई कि दोनों ही संस्थाओं द्वारा पेश किए गए मृत्यु के आंकड़ों में भारी विसंगति है। इस खुलासे के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए सुनवाई 3 सप्ताह के लिए टाल दी।
चिंताजनक है महाराष्ट्र की स्थिति
राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष बहुत तीव्र हो गया है। एक तरफ जहां बाघों के हमलों में इंसानों की जान जा रही है वहीं दूसरी तरफ बाघों की मौत के मामले भी डरावने स्तर पर बढ़ रहे हैं। वर्ष 2025 में सिर्फ 22 दिनों के भीतर 19 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। इसके बाद 2026 की शुरुआत में ही महज 12 दिनों के अंदर 4 बाघों की जान गयी थी, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
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4 बाघों की मौत के संदिग्ध मामले
- वर्धा जिले में बाघिन की मौत (31 दिसंबर 2025): सेलू-मुरपाड इलाके में एक बाघिन का शव मिला। प्राथमिक जांच के अनुसार, खेतों में लगी अवैध बिजली की बाड़ के झटके से उसकी मौत हुई। सबूत मिटाने के लिए शिकारियों ने शव को पुल के नीचे पानी में फेंक दिया था। घटना उजागर होने के कई दिनों बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
- पेंच टाइगर रिजर्व में शावकों की मौत (7 जनवरी, 2026): देवलापार इलाके में 8 से 9 महीने के दो बाघ शावकों की मौत हो गई। वन विभाग ने दावा किया कि इनकी मौत प्रादेशिक वर्चस्व की लड़ाई में हुई लेकिन असल में इनकी मौत किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से होने की गहरी आशंका जताई गई।
- चंद्रपुर में बाघिन का शव (19 जनवरी, 2026): ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के पास चंद्रपुर वन प्रभाग के पायली-भटाली इलाके में चिंचोली गांव के समीप इरई नदी में लगभग 2 साल की एक बाघिन का शव मिला। यहां भी शक है कि उसकी मौत अवैध इलेट्रिक फेंसिंग (बिजली के झटके) से हुई और सबूत नष्ट करने के लिए शव को नदी में फेंक दिया गया।
