डॉक्टरों की चेतावनी: मांगें नहीं मानीं तो इमरजेंसी सेवाएं भी होंगी बंद, संभाजीनगर में 90% निजी हॉस्पिटल बंद
Sambhajinagar Doctors Strike: छत्रपति संभाजीनगर में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से 80-90% निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद रही। 10 हजार मरीज प्रभावित हुए और 2,500 से अधिक सर्जरी टालनी पड़ीं।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
MMC पंजीकरण के विरोध में डॉक्टरों का प्रदर्शन (फोटो नवभारत)
Sambhajinagar Doctors Strike Over MMC Registration: बीएसएमएस और सीसीएमपी चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में पंजीकरण देने के निर्णय के विरोध में निजी चिकित्सकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब शहर की स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है।
हड़ताल के दूसरे दिन बुधवार को शहर के लगभग 80 से 90 प्रतिशत निजी अस्पतालों और दवाखानों की ओपीडी पूरी तरह बंद रही। इसके कारण 10 हजार से अधिक मरीजों को उपचार नहीं मिल सका, जबकि करीब ढाई हजार नियोजित छोटी-बड़ी शल्यक्रियाएं भी स्थगित करनी पड़ीं। हालांकि गंभीर मरीजों के लिए अधिकांश अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गईं।
नाराज डॉक्टरों ने बढ़ाया हड़ताल
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, महाराष्ट्र रेजिडेंट डॉक्टर्स तथा अन्य एलोपैथिक संगठनों ने पहले 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल शुरू की थी। लेकिन सरकार की ओर से मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं आने के बाद बुधवार सुबह छह बजे से आंदोलन को अनिश्चितकालीन कर दिया गया। इसके बाद शहर के अधिकांश निजी अस्पतालों में नियमित ओपीडी सेवाएं बंद रहीं।
सम्बंधित ख़बरें
नागपुर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं! MARD की हड़ताल से मेडिकल-मेयो में मची अफरा-तफरी; OPD में लगी लंबी कतारें
मुंबई में Gen Z और Gen Alpha के साथ कल सीधा संवाद करेंगे RSS प्रमुख मोहन भागवत; NMACC में तैयारी पूरी
बिना टिकट यात्रा पड़ेगी भारी! पश्चिम रेलवे ने वसूला ₹83.25 करोड़ जुर्माना, फर्जी UTS ऐप पर FIR दर्ज
आंगन में चाय बांट रहे थे अभिजीत दीपके, पीछे से शराब लेकर पहुंच गया शख्स; VIDEO देख लोग बोले टायफाइड की दवा है
आंदोलन से मरीजों की बढ़ीं मुश्किलें
निजी अस्पतालों में सेवाएं बंद रहने से शहर और जिले के विभिन्न क्षेत्रों से इलाज के लिए आए हजारों मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ा। कई मरीजों की जांच, उपचार और पहले से तय शल्यक्रियाएं आगे बढ़ानी पड़ीं। चिकित्सकों के अनुसार लगभग ढाई हजार शल्यक्रियाएं स्थगित होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
घाटी अस्पताल पर बढ़ा मरीजों का दबाव
निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद रहने से शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल (घाटी) में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। बुधवार को यहां ओपीडी में 2,267 मरीजों की जांच की गई। निर्धारित 47 शल्यक्रियाओं में से 41 सफलतापूर्वक की गईं, जबकि छह शल्यक्रियाएं मरीजों की चिकित्सकीय स्थिति के कारण स्थगित करनी पड़ीं। इसके अलावा आठ आपातकालीन शल्यक्रियाएं भी की गईं।
रेजिडेंट डॉक्टर भी आंदोलन में शामिल
निजी चिकित्सकों के समर्थन में महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (मार्ड) ने भी कामबंद आंदोलन किया। घाटी अस्पताल परिसर में करीब 240 रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर सरकार के निर्णय का विरोध जताया।
यह भी पढ़ेः- सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई; गड़चिरोली में नक्सलियों के विस्फोटक और आधुनिक हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
इमरजेंसी सेवाएं भी बंद करने की चेतावनी
आईएमए पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीसीएमपी पाठ्यक्रम पूरा करने वाले बीएचएमएस चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण देने का वे विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मुंबई उच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक इस प्रक्रिया को स्थगित रखा जाए।
यदि सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो गुरुवार सुबह छह बजे से निजी अस्पतालों की आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर और गंभीर असर पड़ सकता है।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट
