Nagpur News: शिक्षक बने डेटा एंट्री ऑपरेटर, ऑनलाइन कामकाज से अध्यापन पर सीधा असर
Data Entry Operator: शिक्षकों पर ऑनलाइन और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बढ़ता बोझ पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर डाल रहा है। शिक्षक अब सिर्फ शिक्षक नहीं बल्कि डेटा एंट्री ऑपरेटर बन गए हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Data Entry Operator:शिक्षकों पर ऑनलाइन (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur Education: शिक्षक, यानी विद्यादान का पवित्र कार्य करने वाले सेवक, आजकल अपने मूल काम से दूर होकर ऑनलाइन और गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ तले दब गए हैं। अध्यापन की बजाय, वे विभिन्न पोर्टल, ऐप और रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाओं में फंसे हुए हैं। अब शिक्षक केवल शिक्षक नहीं बल्कि ‘डेटा एंट्री ऑपरेटर’ बनकर रह गए हैं।पहले शिक्षकों को केवल अध्यापन की जिम्मेदारी दी जाती थी, लेकिन बदलती तकनीक और प्रशासनिक आवश्यकताओं के चलते अब गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
छात्रों की उपस्थिति का नियमित काम पहले केवल हाजिरी पुस्तक में दर्ज होता था। अब प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के पोर्टल पर विद्यार्थियों की ऑनलाइन हाजिरी, और विद्यार्थी समीक्षा केंद्र (VSK) एप में भी हाजिरी भरनी पड़ती है। इसका मतलब यह हुआ कि एक ही काम के लिए तीन बार हाजिरी लगाना पड़ता है। ऐसे ऑनलाइन पंजीकरण में रोजाना कम से कम डेढ़ से 2 घंटे का समय लग जाता है।
शिक्षक मानसिक तनाव में
प्रार्थना के बाद हाजिरी में 15-20 मिनट लगते हैं। उसके बाद मिड डे मिल के लिए ऑनलाइन हाजिरी भरनी होती है और फिर VSK सिस्टम में पंजीयन करना पड़ता है। परिणामस्वरूप पाठ्यक्रम पूरा करना, छात्रों से चर्चा करना और उनकी पढ़ाई की दिक्कतों को समझना, इन महत्वपूर्ण कार्यों में देरी होती है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है। कई जगह नेटवर्क की समस्या, इंटरनेट न होना, या सर्वर का हैंग/डाउन होना जैसी दिक्कतें शिक्षक को मानसिक तनाव में डाल रही हैं।
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शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव
शिक्षक अपने मूल अध्यापन कार्य पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। यही कारण है कि सरकारी और अनुदानित स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। गुणवत्ता में गिरावट का असर यह है कि छात्रों की संख्या कम हो रही है और शिक्षकों का अतिरिक्त कार्यभार बढ़ता जा रहा है। सुपरवाइजरी सिस्टम का बढ़ता दबाव भी शिक्षकों के लिए सिरदर्द बन गया है।
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आरटीई एक्ट में स्पष्ट कहा गया है कि शिक्षकों को चुनाव और जनगणना के अलावा कोई गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं दिया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान में 142 तरह के गैर-शैक्षणिक कार्य शिक्षकों से करवाए जा रहे हैं।
