

सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, नागपुर में प्राध्यापक पर छात्रा को कथित आपत्तिजनक संदेश भेजने का आरोप।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रदर्शन कर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।
शिकायतकर्ता छात्रा की पहचान गोपनीय रखने और उस पर दबाव नहीं डालने की मांग।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच पूरी होने तक प्राध्यापक को अवकाश पर भेजा।
पुलिस ने प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय कराया; परिसर में स्थिति शांतिपूर्ण रही।
Symbiosis Nagpur ABVP Protest: नागपुर शहर के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में एक छात्रा को कथित रूप से आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले संदेश भेजे जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और प्रशासन को निवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच तथा उचित कार्रवाई की मांग की। संगठन ने जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने, शिकायतकर्ता छात्रा की पहचान गोपनीय रखने और छात्रा एवं गवाहों पर किसी तरह का दबाव नहीं पड़ने देने का आग्रह किया।
डीसीपी नित्यानंद झा के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच पूरी होने तक संबंधित प्राध्यापक को अवकाश पर भेज दिया है। शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने सुबह और शाम विश्वविद्यालय पहुंचकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस के समन्वय से शिकायतकर्ता छात्रा, उसके पिता और अन्य सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की जांच समिति से मुलाकात की। समिति ने निर्धारित समय में जांच पूरी कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस ने नागरिकों से अपुष्ट जानकारी और अफवाहों से बचने की अपील की है।
नागपुर, सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, नागपुर में एक छात्रा को कथित रूप से आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले संदेश भेजे जाने का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और प्रशासन से निष्पक्ष जांच के साथ उचित कार्रवाई करने की मांग की।
अभाविप के अनुसार, महाविद्यालय के एक प्राध्यापक द्वारा छात्रा को कथित रूप से आपत्तिजनक संदेश भेजे गए थे। छात्रा के परिवार द्वारा उसके मोबाइल में संदेश देखे जाने के बाद मामला सामने आया। संगठन ने इसे छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और शैक्षणिक वातावरण से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए महाविद्यालय प्रशासन को निवेदन सौंपा।
अभाविप ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जाए। जांच पूरी होने तक आवश्यक अंतरिम कार्रवाई की जाए तथा शिकायतकर्ता छात्रा की पहचान गोपनीय रखी जाए। इसके अलावा, छात्रा और गवाहों पर किसी प्रकार का दबाव नहीं पड़ने देने, प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से बचाने और जांच की प्रगति की जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया।
संगठन ने जांच पूरी होने तक संबंधित प्राध्यापक को संस्थान से दूर रखने और मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग भी की। प्रदर्शन में महानगर सहमंत्री संकेत खड़कर, पश्चिम जिला संयोजक तनु समुद्रे और दक्षिण जिला संयोजक अथर्व देशमुख सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
मामले को लेकर हुए घटनाक्रम की जानकारी देते हुए डीसीपी नित्यानंद झा ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित प्राध्यापक को जांच पूरी होने तक अवकाश पर भेज दिया है। शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने सुबह और शाम विश्वविद्यालय पहुंचकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच चर्चा कराई, ताकि मामले को लेकर समन्वय स्थापित किया जा सके।
शनिवार शाम शिकायतकर्ता छात्रा, उसके पिता और अन्य सदस्यों सहित छह से सात लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की जांच समिति से मुलाकात की। समिति ने निर्धारित समय में मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
प्रशासन और पुलिस ने परिसर में मौजूद विद्यार्थियों को भी घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, पूरा घटनाक्रम शांतिपूर्ण रहा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या सामने नहीं आई।
पुलिस ने नागरिकों से अपुष्ट जानकारी साझा करने और अफवाहों पर विश्वास करने से बचने की अपील की है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होने की अपेक्षा है।