

Maharashtra School Closure Teachers Protest: महाराष्ट्र के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान के तहत सौंपी गई बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ड्यूटी से शिक्षकों को पूरी तरह मुक्त करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से शिक्षकों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी मुद्दे को लेकर 9 जुलाई को राज्यभर में स्कूल बंद रखने और विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षक संगठनों ने घोषणा की है कि 9 जुलाई को जिला स्तर पर शिक्षा विभाग और प्रशासनिक कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए जाएंगे। वहीं मुंबई के आजाद मैदान में बड़ी संख्या में शिक्षक धरना देकर सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाएंगे। आंदोलन में राज्य के कई शिक्षक संगठन एकजुट होकर हिस्सा लेंगे।
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में वर्ष 2013 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की अनिवार्यता से राहत देना शामिल है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अनुभव को महत्व दिया जाना चाहिए। साथ ही राज्य सरकार से टीईटी के मौजूदा ढांचे को अधिक व्यावहारिक और शिक्षक-अनुकूल बनाने की मांग भी की गई है, ताकि अनुभवी शिक्षक आसानी से परीक्षा उत्तीर्ण कर सकें।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि बीएलओ जैसी गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों के कारण शिक्षक विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। इससे कक्षाओं का संचालन और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व शिक्षण कार्य है, इसलिए उन्हें अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाना चाहिए।
शिक्षकों ने राज्य सरकार की नई पदोन्नति नीति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था अनुभव और वरिष्ठता के अनुरूप नहीं है, जिससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ न्याय नहीं हो रहा। महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर टीईटी नियमों, पदोन्नति नीति और गैर-शैक्षणिक कार्यों से जुड़े मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।