

21 Candidate Contesting Datia By Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। अंतिम दिन दो उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लेने के बावजूद मुकाबला बहुकोणीय बना हुआ है। अब नोटा सहित कुल 22 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने के कारण निर्वाचन आयोग ने इस बार हर मतदान केंद्र पर दो बैलेट यूनिट वाली ईवीएम लगाने का फैसला किया है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इससे मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित की जा सकेगी और मतदाताओं को सभी उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिह्न स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
नामांकन वापसी के अंतिम दिन शादाबुद्दीन और मेहरवान सिंह बघेल ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे पहले केशव यादव भी चुनावी दौड़ से बाहर हो चुके थे। इन नाम वापसी के बाद भी दतिया उपचुनाव में उम्मीदवारों की संख्या 22 बनी हुई है। बड़ी संख्या में प्रत्याशियों के मैदान में होने से मुकाबला पहले की तुलना में अधिक रोचक और बहुकोणीय हो गया है। राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।
निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार एक बैलेट यूनिट में नोटा सहित अधिकतम 16 उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिह्न ही दर्ज किए जा सकते हैं। चूंकि इस बार मैदान में कुल 22 उम्मीदवार हैं, इसलिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर दो बैलेट यूनिट वाली ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। मतदान के दौरान मतदाताओं को दोनों यूनिट में उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिह्न दिखाई देंगे, जिससे वे आसानी से अपने पसंदीदा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर सकेंगे।
नामांकन पत्रों की जांच और वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला प्रशासन ने अंतिम उम्मीदवारों की सूची भारत निर्वाचन आयोग को भेज दी। इसके बाद चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया पूरी की गई। अब सभी उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिह्न ईवीएम में दर्ज किए जाएंगे, ताकि मतदान से पहले मशीनों की तैयारी पूरी की जा सके।
दो बैलेट यूनिट वाली ईवीएम के उपयोग को देखते हुए निर्वाचन विभाग मतदान अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देगा। अधिकारियों का कहना है कि मतदान केंद्रों पर ऐसी सभी व्यवस्थाएं की जाएंगी, जिससे मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
22 उम्मीदवारों के मैदान में होने से दतिया उपचुनाव का मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि बहुकोणीय मुकाबले का सबसे अधिक राजनीतिक लाभ किस उम्मीदवार को मिलता है।
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