नागपुर: गर्ल्स हॉस्टल की मेस के खाने में मिले कीड़े, विरोध पर छात्राओं को मिली धमकी, मेस ठेका रद्द

Shivaji Science College Mess Controversy: शिवाजी साइंस कॉलेज गर्ल्स हॉस्टल के खाने में कीड़े मिलने से हड़कंप। वीडियो वायरल होने और छात्राओं के हंगामे के बाद प्रशासन ने मेस ठेकेदार का ठेका किया रद्द।
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हॉस्टल फूड क्वालिटी पर छात्राओं का विरोध(सोर्स: गुगल जेमिनी)
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Mess Contractor Contract Cancelled: नागपुर के प्रसिद्ध श्री शिवाजी साइंस कॉलेज, कांग्रेस नगर के गर्ल्स हॉस्टल में मेस के घटिया खाने से उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। भोजन में कीड़े और लारवा मिलने के सोशल मीडिया वीडियो और छात्राओं के लगातार आक्रोश के बाद कॉलेज प्रशासन को आखिरकार मेस ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करना पड़ा। लेकिन इस कार्रवाई ने राहत से ज्यादा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो साल की अनदेखी का जिम्मेदार कौन?

छात्राओं का आरोप है कि मेस के घटिया खाने, गंदगी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायतें पिछले दो सालों से की जा रही थीं। सवाल यह उठता है कि जब छात्राएं लंबे समय से अस्वास्थ्यकर भोजन की शिकायत कर रही थीं, तब कॉलेज प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग (FDA) किस नींद में सो रहा था? क्या छात्राओं की सेहत के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति इतने सालों से सिर्फ इसलिए मिली हुई थी क्योंकि कोई बड़ा सोशल मीडिया हंगामा नहीं हुआ था?

विरोध करने वाली छात्राओं पर कथित दबाव

विवाद का सबसे गंभीर पहलू छात्राओं को कथित तौर पर धमकाए जाने के आरोप हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ छात्राओं ने खराब भोजन के फोटो और वीडियो जुटाकर विरोध दर्ज कराया था। आरोप है कि उन्हें चुप रहने और कार्रवाई के डर का सामना करना पड़ा।

यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला केवल मेस की लापरवाही का नहीं, बल्कि शिकायतकर्ताओं को डराने की कोशिश का भी बन सकता है। ऐसे में छात्राओं की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।

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अब नए ठेकेदार के सामने बड़ी जिम्मेदारी

ठेका रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती हॉस्टल की छात्राओं को नियमित रूप से स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। नए मेस प्रबंधन में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।

साथ ही, छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और भोजन के नमूनों की जांच भी अहम होगी। सवाल यह है कि क्या केवल ठेका रद्द करने से समस्या खत्म होगी या कॉलेज प्रशासन भविष्य में ऐसी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था भी बनाएगा।

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