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गंभीर हुए मरीज सीधे मेडिकल में रेफर; प्राइवेट अस्पतालों से हर दिन आ रहे 10 पेशेंट

  • Written By: नवभारत डेस्क
Updated On: Dec 15, 2021 | 02:09 AM
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नागपुर. प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीजों की तबीयत गंभीर होने के बाद डॉक्टर हाथ खड़े कर देते हैं. इस हालत में मरीजों को सीधे मेडिकल में रेफर किया जाता है. इन मरीजों को एम्बुलेंस से उतारते ही वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है, जबकि मेडिकल में सभी मरीजों को वेंटिलेटर मिलना मुश्किल हो रहा है. हर दिन करीब गंभीर 10 मरीज मेडिकल रेफर किए जा रहे हैं.

सिटी में प्राइवेट अस्पतालों की कमी नहीं है. साथ ही यहां उपचार भी अच्छा होता है लेकिन जब मरीज की तबीयत गंभीर हो जाती है तो उसे मेडिकल में रेफर किए जाने का चलन बढ़ गया है. दरअसल मरीज की तबीयत गंभीर होने के बाद डॉक्टरों द्वारा परिजनों की योग्य तरीके से काउंसलिंग करने की बजाय उन्हें अन्य जगह ले जाने की सलाह दी जाती है. इनमें वृद्ध मरीजों की संख्या अधिक बताई जा रही है. प्राइवेट अस्पतालों में मरीज के इलाज का बिल जैसे-जैसे बढ़ने लगता है, वैसे-वैसे मरीज को रेफर करने के लिए दबाव बनाया जाता है.

नाराजगी का सामना कर रहे डॉक्टर

मेडिकल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि पिछले सप्ताहभर में हर दिन 10 मरीज गंभीर अवस्था में आए. यानी सप्ताहभर के भीतर करीब 70 से अधिक मरीजों को रेफर किया गया. सभी मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत थी. मेडिकल में पहले से ही मरीजों की भीड़ है. इस हालत में सभी गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर मिल पाना संभव नहीं होता. इस हालत में परिजनों की नाराजगी का सामना डॉक्टरों को करना पड़ रहा है. मेडिकल में पिछले 2 वर्षों से अधिक समय से एमआरआई जांच बंद है. गंभीर मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में एमआरआई की जांच के लिए भेजना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है. यही वजह है कि डॉक्टरों के सामने दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं. प्राइवेट से आने वाले मरीज पहले ही गंभीर अवस्था में होते हैं. उन्हें आईसीयू में ही भर्ती करना आवश्यक होता है. पहले ही लाखों रुपये खर्च कर चुके परिजन और अधिक खर्च के लिए तैयार भी नहीं होते. 

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मेयो से भी भेज रहे 

प्राइवेट अस्पतालों से तो मरीज आ ही रहे हैं, साथ ही मेयो से भी मरीजों को रेफर किए जाने की संख्या बढ़ने लगी है. मेयो में मस्तिष्क रोग और प्लास्टिक सर्जरी विभाग नहीं हैं. इस हालत में उक्त बीमारियों के मरीजों को भी मेडिकल में रेफर किया जा रहा है. कई बार तो एम्बुलेंस वाले मरीजों को कैजुअल्टी के सामने लाकर छोड़ देते हैं. परिजन भर्ती करने के लिए चक्कर लगाते रहते हैं. नियमानुसार यदि संबंधी पैथी का विभाग या डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने पर कॉल कर मेडिकल या सुपर से बुलाया जाता है. लेकिन सीधे मेडिकल के लिए रेफर किये जाने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है. 

Serious patients referred directly to the medical 10 patients coming every day from private hospitals

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Published On: Dec 15, 2021 | 02:09 AM

Topics:  

  • Nagpur
  • Nagpur News
  • Serious patients

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