35 अंक पाने वाला विद्यार्थी मेरिट में नहीं आता, सुधीर मुनगंटीवार ने ठाकरे बंधुओं को मारा टोला
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों काफी उथल-पुथल मची हुई है। इस पर सुधीर मुनगंटीवार ने चुटकी ली है और ठाकरे बंधुओं पर तंस कसा है।
- Written By: प्रिया जैस
सुधीर मुनगंटीवार और ठाकरे बंधु (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Sudhir Mungantiwar: चुनाव जीतने के लिए लोगों के हितों का काम करना होता है। केवल मोदी का विरोध करने से कोई फायदा नहीं है। 35 अंक प्राप्त करने वाला विद्यार्थी मेरिट में नहीं आता। उसे अध्ययन करना पड़ता है। यह कहते हुए भाजपा नेता व पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने ठाकरे बंधुओं को टोला मारा। वे नागपुर में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि राज व उद्धव ठाकरे चचेरे भाई हैं। एक साथ आने में इतना समय लग रहा है, यह समझ से परे है। उनके विचार एक हैं। दोनों को बालसाहब ठाकरे का आशीर्वाद मिला। उनके साथ आने में किसी को आपत्ति नहीं है। उन्हें हमारी शुभकामनाएं हैं। पितृ पक्ष में उनकी चर्चा शुरू है। नवरात्र तक स्थायी रूप से वे साथ आकर जनता की आवाज बनें, ऐसी अपेक्षा है।
पहले यूरिया दें, फिर ज्ञान
मुनगंटीवार ने कहा कि किसानों को ज्ञान देने भर से नहीं चलेगा। उचित समय पर उन्हें यूरिया लगेगा। ढाई लाख करोड़ रुपये हम वेतन पर खर्च करते हैं। 8 हजार करोड़ ब्याज भरते हैं। फिर भी ऐसी अवस्था निर्माण हुई है तो ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने विस क्षेत्र के किसानों को यूरिया की कमी न हो, इसका प्रयास किया। अपना ज्ञान अपनी जेब में रखो। पहले यूरिया दो, फिर ज्ञान।
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ओबीसी युवा की आत्महत्या पर भी उन्होंने चिंता जताते हुए अपील की कि कोई सुसाइड न करे। मां के पेट में हम 9 महीने रहते हैं। इसका भान होना चाहिए। संघर्ष करो, आत्महत्या उचित नहीं। उन्होंने कहा कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, इसलिए उनके आरक्षण को दूर-दूर तक धक्का नहीं पहुंच सकता। जब कांग्रेस नेता मनोज जरांगे से मुलाकात करने गए तब कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ओबीसी कोटे से आरक्षण की मांग की थी। जब उनके ध्यान में यह बात आई तो अब कोटे से आरक्षण न दें, यह मांग कर रहे हैं। दोनों समाज पर अन्याय नहीं हो, यह भूमिका जरूरी है।
भुजबल की डबल नीति
मंत्री छगन भुजबल ओबीसी समाज के लिए हमेशा कैबिनेट में अग्रणी भूमिका रखते हैं। अब उनकी क्या भूमिका है, यह वही अधिक स्पष्ट बता सकते हैं। हालांकि उनकी डबल नीति नजर आती है।
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चुनाव नहीं, निधि नहीं
मुनगंटीवार ने कहा कि न्यायालयीन प्रक्रिया के चलते चुनाव लंबा लटक सकता है। इसमें नहीं पड़ना चाहिए। इससे महाराष्ट्र का बड़ा नुकसान होगा। केन्द्रीय वित्त आयोग का 3500 करोड़ अटका है। हम आर्थिक संकट में हैं। अनेक नगर पंचायतों के बिल प्रलंबित हैं। मजदूरी देने के लिए पैसे नहीं हैं। इस संदर्भ में वित्त मंत्रालय से चर्चा की तो बताया कि जब तक चुनाव नहीं तब तक निधि नहीं की शर्त नियमों में है। उन्होंने कहा कि मेरे जिले की नगर पंचायत, नगर परिषद में आज कटोरा लेकर घूमने की नौबत आ गई है। इसलिए चुनाव को टालना ठीक नहीं।
