मराठी नहीं आई तो 1 महीने की मोहलत! नागपुर RTO की परीक्षा में फेल हुए 17 ऑटो चालक, जारी हुई नोटिस

Nagpur Marathi Test: नागपुर में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की मौखिक परीक्षा शुरू हुई। दो दिनों में 350 में से 17 चालक फेल हुए, जिन्हें एक महीने में मराठी सीखने का नोटिस दिया गया।
17 auto-rickshaw drivers fail Marathi proficiency test
मराठी ज्ञान की परीक्षा में 17 ऑटो चालक फेलफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Nagpur Auto Drivers Marathi Test: ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के बाद नागपुर में प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा शुरू की गई मौखिक परीक्षा में शुरुआती 2 दिनों में 350 में से 17 ऑटो चालक अनुत्तीर्ण हो गए हैं।

आरटीओ अधिकारियों ने इन चालकों को एक महीने के भीतर मराठी सीखने और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने को नोटिस जारी की है। राज्य सरकार ने 1 मई से ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किया था जिसके बाद चालकों को भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया।

यात्रियों से सुगम संवाद और राज्य की आधिकारिक भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने यह निर्णय लिया। नागपुर में इस नियम का क्रियान्वयन 20 अगस्त से शुरू हुआ।

17 auto-rickshaw drivers fail Marathi proficiency test
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ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा क्यों अनिवार्य की गई?

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने का फैसला मुख्य रूप से यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संवाद सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया है।

इसके पीछे प्रमुख कारण हैं

  • यात्रियों से सुगम संवाद: चालक यात्रियों की बात समझ सकें और मराठी में जरूरी जानकारी दे सकें।

  • स्थानीय भाषा को बढ़ावा: मराठी महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा है, इसलिए सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों में इसके व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देना।

  • पता और गंतव्य समझने में आसानी: स्थानीय इलाकों, रास्तों और गंतव्यों के नाम समझने में भाषा की समस्या न आए।

  • यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा: आपात स्थिति में चालक और यात्री एक-दूसरे से प्रभावी ढंग से संवाद कर सकें।

  • सेवा की गुणवत्ता में सुधार: भाषा की बाधा कम होने से यात्रियों को ऑटो-टैक्सी सेवा लेने में आसानी हो।

गरीब चालकों को परेशान करने की स्टंटबाजी

विदर्भ ऑटो-रिक्शा फेडरेशन के अध्यक्ष और महाराष्ट्र ऑटो रिक्शा चालक-मालिक संयुक्त कृति समिति के महासचिव विलास भालेकर ने इस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि ऑटो चालकों के सामने आजीविका से जुड़े कई बड़े सवाल हैं।

उन्हें हल करने के बजाय परिवहन मंत्री गरीब चालकों को परेशान करने को स्टंटबाजी कर रहे हैं। ओला, उबर और रैपिडो जैसी एग्रीगेटर सेवाओं के चालकों पर ऐसी कोई सख्ती नहीं की जा रही है। यदि सरकार मराठी सीखने का समय दे रही है तो उसने अब तक कितने प्रशिक्षण क्लासेज शुरू किए। केवल गरीब ऑटो चालकों को निशाना बनाने के बजाय राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए मराठी अनिवार्य की जानी चाहिए।

Marathi proficiency mandatory for auto-rickshaw and taxi drivers
ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी जरूरीफोटो सोर्स- नवभारत

नोटिस के बाद भी नहीं सीखी मराठी तो रद्द होगा लाइसेंस

जांच के दौरान जिन चालकों को व्यावहारिक मराठी का ज्ञान नहीं था, उन्हें महीने की नोटिस जारी की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी चालक जानबूझकर मराठी सीखने से इनकार करते हैं या असमर्थ रहते हैं तो उनका बैज और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

नागपुर शहर, पूर्व नागपुर और नागपुर ग्रामीण आरटीओ क्षेत्रों में 2 दिनों के भीतर 350 चालकों की जांच की गई। मुंबई की तुलना में नागपुर में मराठी न जानने वाले चालकों का प्रतिशत काफी कम है। बाहरी राज्यों से आए अधिकतर चालक वर्षों से यहां रह रहे हैं जिससे वे मराठी समझ लेते हैं। परेशानी केवल नए आए चालकों के साथ देखी जा रही है।

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