महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, 1 महीने में भाषा न सीखने पर 3 माह के लिए बैज होगा रद्द

Maharashtra Marathi Mandate: महाराष्ट्र में ऑटो व टैक्सी चालकों के लिए व्यावहारिक मराठी ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। नोटिस मिलने के 1 महीने में भाषा न सीखने पर बैज और लाइसेंस निलंबित किया जाएगा।
Marathi made mandatory for auto-taxi drivers in Maharashtra; failure to learn the language within one month
महाराष्ट्र आरटीओ मराठी अनिवार्यतासोर्स- सोशल मीडिया
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Maharashtra Auto Taxi Drivers Marathi Inspection: गैर-मराठी ऑटो रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को सख्त हिदायत दी गई है कि यदि नोटिस जारी होने के बाद एक महीने के अंदर मराठी भाषा नहीं सीखी गई तो उनका लाइसेंस और बैज तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा। लगातार नियमों का पालन नहीं करने पर लाइसेंस और बैज रद्द भी किए जा सकते हैं। गुरुवार से पूरे राज्यभर में मराठी भाषा ज्ञान की जांच मुहिम शुरू की गई है।

मुंबई, ठाणे सहित पूरे एमएमआर क्षेत्र में भी ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के सामान्य मराठी भाषा ज्ञान का निरीक्षण किया गया। एमएमआर क्षेत्र में 604 ड्राइवरों को नोटिस जारी की गई। यह मुहिम 30 सितंबर 2026 तक राज्य में चलेगी। परिवहन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार एमएमआर क्षेत्र में 3,995 ड्राइवरों की जांच की गई। इनमें से 604 ड्राइवरों को मराठी की कम जानकारी मिली, और उन सभी को नोटिस जारी किए गए। राज्य के बाकी हिस्सों से 4,222 ड्राइवरों का निरीक्षण किया गया। इनमें से 664 ड्राइवरों को नोटिस दी गई।

मुंबई-ठाणेः फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए भी निरीक्षण

मुंबई के ताड़देव आरटीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उड़न दस्तों को भी एक दिन पहले परिवहन आयुक्त कार्यालय से मिले निर्देश के अनुसार कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। अंधेरी आरटीओ कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि

वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए आने वाले ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के मराठी ज्ञान की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि चालकों की यूनियनों ने चेतावनी दी है कि नियम लागू करने के दौरान यदि चालकों को आर्थिक परेशानी होती है या कथित तौर पर उनका शोषण किया जाता है, तो वे आंदोलन कर सकते हैं।

अब तक 1.65 लाख से अधिक चालकों को ट्रेनिंग

परिवहन विभाग की पहल पर पिछले 105 दिनों तक कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ की मदद से राज्य में ऑटो रिक्शा-टैक्सी ड्राइवरों के लिए 'हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान' चलाया गया था। इस अभियान में लगभग 1 लाख 65 हजार 600 अमराठी रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने मराठी की ट्रेनिंग ली।

ठाणे के गडकरी रंगायतन में हिस्सा लेने वाले ड्राइवरों को सर्टिफिकेट दिए गए। राज्य में 1989 से जो नियम है, उसके हिसाब से रिक्शा-टैक्सी चलाने के लिए मराठी की प्रैक्टिकल जानकारी जरूरी है। इस नियम को 12 अगस्त 2026 को बने कानूनी नियम के हिसाब से सख्ती से लागू किया जा रहा है।

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नए बैज के लिए भी अब मराठी ज्ञान की परीक्षा

राज्य में अब तक करीब 9 लाख 65 हजार रिक्शा टैक्सी लाइसेंस और बैज जारी किए गए हैं। अब से नए लाइसेंस और बैज जारी करते समय आरटीओ अधिकारी सीधे बातचीत करके यह जांच करेंगे कि ड्राइवर को मराठी का सामान्य ज्ञान है या नहीं।

यह बातचीत वीडियो के जरिए रिकॉर्ड की जाएगी, बैज तभी जारी किया जाएगा जब यह साफ हो जाएगा कि उसे सामान्य मराठी का ज्ञान है। इसके अलावा फर्जी डोमिसाइल सर्टिफिकेट की भी जांच होगी। यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित व्यक्ति महाराष्ट्र में 15 साल से रह रहा है या नहीं। (देखें प्लस 3 भी)

ठाणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय ने शुरू किया अभियान

ठाणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय ने कार्रवाई शुरू की है। इस वजह से मराठी न जानने वाले ऑटो चालकों में जांच से बचने के लिए हड़कंप मच गया है। नवी मुंबई के रिक्शा चालक भी कार्रवाई को लेकर परेशान दिखाई दे रहे थे। गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों को व्यावहारिक मराठी भाषा न आने के कारण यात्रियों और चालकों के बीच विवाद की कई घटनाएं सामने आई हैं।

नवी मुंबई में 375 रिक्शा चालकों की हुई जांच

ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य करने के निर्णय का क्रियान्वयन गुरुवार से शुरू हो गया है। इसके तहत नवी मुंबई में क्षेत्रीय परिवहन विभाग ने मराठी न जानने वाले रिक्शा चालकों की जांच शुरू कर दी है। आरटीओ की टीमों ने शहर के मुख्य चौको और अधिक आवाजाही वाले स्थानों पर रिक्शा रोककर चालकों से मराठी में बातचीत कर उनके भाषा ज्ञान की जांच की। दिनभर में नवी मुंबई में कुल 375 रिक्शा चालको की जांच की गई, जिसमें से मराठी न बोल पाने वाले 27 चालकों को नोटिस जारी किए गए हैं।

  • परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बाताया की कारोबार करने वाले और कमर्शियल 66 डाइवरों के लिए यह सिर्फ नियमों का मामला नहीं है। बल्कि यात्रियों की सुविधा और सुविधा से जुड़ा मामला है, चालकों को मराठी सीखने के लिए काफी समय दिया जा रहा है। जो लोग दी गई डेडलाइन के बाद भी नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

  • बांद्रा टर्मिनस टैक्सी यूनियन अनिल सोनार ने बाताया की मेरा जन्म मुंबई में हुआ है और मैं यहीं से पढ़ा लिखा 66 हूँ। मुझे मराठी बोलने समझने में कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन पहले दिन मुझे किसी ने जांच के लिए नहीं रोका।

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