NMC General Body Meeting Language Row: महानगरपालिका की गुरुवार को हुई आम सभा में भाषा के मुद्दे को लेकर भारी बवाल देखने को मिला। सदन की कार्यवाही के दौरान एक ओर जहां प्रश्नोत्तर काल में स्कूलों की दिंडी यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल पर शिक्षण समिति की सभापति द्वारा संस्कृति का पाठ पढ़ाया गया, वहीं कुछ ही देर बाद अन्य प्रश्न को लेकर सत्ता पक्ष की ओर से ही भाषा का विवाद खड़ा कर दिया गया। 'सदन में सिर्फ मराठी में बोलना चाहिए' की मांग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो गई।
विवाद इतना बढ़ गया कि सदन में गूंजते शोरगुल के बीच महापौर नीता ठाकरे को बैठक की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। जानकारों की मानें तो सदन की कार्यवाही सुचारू और शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की होती है। किंतु गुरुवार को सदन में सत्ता पक्ष की ओर से ही हंगामा होते देखा गया। जिसे लेकर गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं होते रही।
सदन की शुरुआत में प्रश्नकाल के दौरान नगरसेवक शैलेंद्र डोरले ने वारकरी दिंडी का मुद्दा उठाया था। इस पर उपायुक्त मेघना वासनकर द्वारा जवाब दिए जाने के बाद, शिक्षा सभापति संतोषीदेवी लड्ढा ने बिना आवश्यकता के हिन्दी में उत्तर देना शुरू कर दिया। लड्डा ने आरोप लगाया कि डोरले दिंडी का विरोध कर रहे है, जिसका मतलब है कि वे भगवान राम का ही विरोध कर रहे हैं, जिससे मामला गर्मा गया।
हालांकि किसी भी सभापति को जवाच देने का कोई अधिकार नहीं है। इसके बावजूद उनके द्वारा वक्तव्य पूरा किया गया। इस आरोप पर कड़ी आपत्ति जताते हुए डोरले ने तुरंत इसका खंडन किया और स्पष्टीकरण देते हुए कहा, 'मेरे पिता के नाम में ही श्रीराम है, मैं खुद एक रामभक्त हूं और मेरा दिंडी को कोई विरोध नहीं है।'
इस बहस के तुरंत बाद सदन में भाषा का मुद्दा उठ खड़ा हुआ। कांग्रेस नगरसेवक केतन ठाकरे ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि जब सरकार ने ऑटो चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य कर दिया है तो सदन में भी सभी को मराठी में ही बात करनी चाहिए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की गुट नेता आभा पांडे ने भी केतन ठाकरे की बात का समर्थन किया। उन्होंने शिक्षा सभापति के हिन्दी में बोलने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि महानगरपालिका के सदन में सदस्यों का मराठी में बोलना नियम है। इसी बीच, नगरसेवक वसीम खान ने खड़े होकर महापौर से विनती की, 'मुझे मराठी ठीक से बोलनी नहीं आती, मैं इसे सीखने की कोशिश कर रहा हूं। इसलिए, तब तक मुझे हिन्दी में बोलने की अनुमति दी जाए।"
सदन में हिन्दी बोली जा सकती है या नहीं, इसे लेकर सदस्यों के बीच विवाद और गहरा गया तथा कई लोगों ने नियमों का हवाला देते हुए हिन्दी का कड़ा विरोध किया। हंगामा बढ़ता देख मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने नियमों का खुलासा करते हुए सदन को बताया, मनपा अधिनियम के अनुसार, यदि किसी सदस्य को मराठी नहीं आती है, तो उसे हिन्दी या अंग्रेजी में बोलने की छूट दी गई है।
आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर के इस स्पष्टीकरण के बावजूद भी सदन में जारी विवाद नहीं थमा कांग्रेस के नगरसेवक अभिजीत झा और सत्ताधारी भाजपा के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई जिससे सदन में पूरी तरह से अफरातफरी का माहौल बन गया।
हालात बेकाबू होते देख महापौर नीता ठाकरे ने सभी सदस्यों से शांत रहने की अपील की लेकिन सदस्यों का हंगामा जारी रहा, जिसके चलते आखिरकार महापौर को सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। 10 मिनट के ब्रेक के बाद जब बैठक दोबारा शुरू हुई, तब जाकर यह विवाद शांत हो सका।
सदन में मनपा के प्रशासकीय कामकाज में बाहरी दखलंदाजी को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया। सदन की कार्यवाही के दौरान महानगरपालिका के कामकाज में अनुशासन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। सदन में यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि सभी सदस्यों ने केवल अपने-अपने क्षेत्रों के विकास और कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। सबसे अहम मुद्दा नगरसेवकों और नगरसेविकाओं के रिश्तेदारों द्वारा प्रशासन में दखल देने का रहा।
इस पर सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पार्षदों के परिजन या रिश्तेदार प्रशासन पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बनाएंगे और महानगरपालिका के कामकाज में उनका कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। चुनाव संपन्न होने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने भी इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इसी संदर्भ में मनपा आयुक्त से कहा गया है कि वे मुख्यमंत्री के उन निर्देशों से सभी को एक बार फिर से अवगत कराएं और सुनिश्चित करें कि भविष्य में इस तरह का कोई हस्तक्षेप न हो।