नागपुर RTO में चोरी के ट्रकों का फर्जी रजिस्ट्रेशन, अरुणाचल प्रदेश के रास्ते हुआ खेल, 3 पर केस दर्ज

Nagpur Crime Update: नागपुर ग्रामीण आरटीओ में चोरी के ट्रकों का फर्जी दस्तावेजों के जरिए रजिस्ट्रेशन कराने का मामला खुला है। कपिलनगर पुलिस ने इस धोखाधड़ी में तीन आरोपियों पर केस दर्ज किया है।
A fake registration scam involving stolen trucks has been uncovered at the Nagpur Rural RTO. Kapil Nagar police have registered a fraud case against three suspects.
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - AI)
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Nagpur RTO Scam Fake Truck Registration: चोरी के ट्रकों का नागपुर आरटीओ में रजिस्ट्रेशन करवाने का एक और मामला सामने आया है। इस बार फर्जीवाड़े का खुलासा खुद आरटीओ अधिकारी द्वारा किया गया। इसके पहले भी फर्जी रजिस्ट्रेशन के मामले शहर में सामने आ चुके हैं जिनमें स्थानीय ट्रांसपोर्टर और दलालों की भूमिका सामने आई थी। अब 3 नए नाम सामने आए है लेकिन उनके पीछे भी नागपुर के ही ट्रांसपोर्टर का हाथ होने की जानकारी मिल रही है।

आरोपियों में खापरखेड़ा निवासी मोहम्मद हुसैन मोहम्मद इस्माइल, सावनेर निवास दिनेश कुमार ओमप्रकाश और आकोट फाइल, अकोला निवासी मोहम्मद एजाज अब्दुल रहमान का समावेश है। नागपुर ग्रामीण आरटीओ कार्यालय के मोटर वाहन निरीक्षक होमेश चंद्रकांत काले की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया है।

वाहन रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज खंगालने पर काले को इस जालसाजी का पता चला। वर्ष 2022 में अरुणाचल प्रदेश रजिस्ट्रेशन के 4 ट्रकों का पंजीयन नागपुर ग्रामीण आरटीओ कार्यालय में किया गया। रजिस्ट्रेशन के बाद से चारों वाहन रास्ते पर दौड़ रहे हैं। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि पहले इन चारों ट्रकों का रजिस्ट्रेशन मध्य प्रदेश के देवास में करवाया गया था।

ट्रांसफर किया अरुणाचल प्रदेश

उस समय भी फर्जी रजिस्ट्रेशन का मुद्दा गरम था। किसी को सदेह न हो इसीलिए पहले वाहनों का ट्रांसफर अरुणाचल प्रदेश में किया गया। वहां से फर्जी दस्तावेज बनाने के बाद नागपुर ग्रामीण आरटीओ में रजिस्ट्रेशन करवाया गया, जबकि असली खरीदार का कोई विवरण ही सामने नहीं आया है। लिखित शिकायत मिलने के बाद कपिलनगर पुलिस ने तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

कपिलनगर के थानेदार सतीश आड़े ने बताया कि पहले तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। इसके बाद ही पता चल पाएगा कि इस फर्जीवाड़े में आरटीओ कार्यालय से संबंधित कर्मचारी या दलालों की भूमिका है या नहीं। इसी तरह का मामला वर्ष 2024 में भी गिट्टीखदान थाने में दर्ज किया गया था जिसकी जांच करने के लिए तत्कालीन सीपी ने एसआईटी का गठन किया था। उन आरोपियों का इस मामले से कोई संबंध है या नहीं, यह भी पता लगाया जाएगा।

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