RTMNU की बड़ी 'भूल', बिना एडमिट कार्ड परीक्षा हॉल में पहुंचे छात्र, VC ने मानी गलती

Nagpur University Vacancies: नागपुर विवि की शीत सत्र परीक्षा में बिना एडमिट कार्ड शामिल हुए छात्र। उपकुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर ने मानी गलती, रिक्त पदों और हॉस्टल मरम्मत पर दी जानकारी।
Nagpur University Exams 2026 RTMNU Admit Card Controversy
नागपुर यूनिवर्सिटी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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RTMNU Admit Card Controversy: नागपुर राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा ली जा रही शीत सत्र परीक्षाओं के दौरान एक गंभीर घटना सामने आई। छात्रों को बिना प्रवेश पत्र दिए परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई, जबकि नियमों के मुताबिक परीक्षा से कम से कम 15 दिन पहले प्रवेश पत्र मिल जाना चाहिए। इस घटना को लेकर विश्वविद्यालय की आलोचना हो रही है।

इस पर उपकुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर ने सफाई देते हुए कहा कि प्रवेश पत्र देना जरूरी था लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासकीय कारणों से ऐसा नहीं हो सका। परीक्षा के दौरान कोई गड़बड़ी नहीं हुई। यह तर्क कि प्रवेश पत्र नहीं होने से कोई अन्य छात्र परीक्षा दे सकता है, सही नहीं है। इन गड़बड़ियों में सुधार किया जाएगा। भविष्य में इस तरह ही ‘गलती’ नहीं दोहराई जाएगी।

पत्रकारों से चर्चा के दौरान डॉ. क्षीरसागर ने बताया कि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और नॉन-टीचिंग स्टाफ के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। कुल 282 मंजूर पदों में से 1 जुलाई तक 172 पोस्ट खाली थीं और सिर्फ 86 पद ही कार्यरत हैं। यदि कोई पद खाली होता है या कम होता है तो रोस्टर बदल जाता है जिससे भर्ती प्रक्रिया में मुश्किलें आ रही हैं।

हॉस्टलों का नवीनीकरण, दुरुस्ती भी

हॉस्टलों की दयनीय अवस्था पर नागपुर यूनिवर्सिटी के वीसी ने बताया कि नवीनीकरण और दुरुस्ती का काम चल रहा है। इसमें पूरी इलेक्ट्रिकल पाइपलाइन बदलना, प्लंबिंग, टाइल्स लगाना और प्लास्टर करना आदि का समावेश है। आर्किटेक्ट के निरीक्षण में पता चला कि दीवारें टूट रही हैं, इसलिए नई प्लास्टरिंग की जा रही है। इस काम पर लगभग 5 से 5.5 करोड़ का खर्च आने की उम्मीद है।

नवीनीकरण का काम अलग-अलग फेज में किया जाएगा, ताकि छात्रों को एक से दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में एक से डेढ़ वर्ष का समय लग जाएगा। नई सड़कें बनने, ड्रेनेज लाइन ऊंची होने की वजह से 70 से 72 साल पुराना हॉस्टल नीचे हो गया है। पुरानी सीमेंट पाइपलाइन जाम हो गई है और उसमें पेड़ की जड़ें घुस गई हैं। इसलिए नये सेप्टिक टैंक, चैंबर और नई पाइपलाइन बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।

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