RTE एडमिशन के नए ‘दूरी नियमों’ पर कानूनी रार! नागपुर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
Nagpur RTE Admission: आरटीई प्रवेश के लिए तय नए दूरी आधारित मानकों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, आरटीई प्रवेश,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur RTE Admission Distance Criteria: नागपुर राज्य में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत होने वाली प्रवेश प्रक्रिया एक बार फिर कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है। आरटीई के तहत प्रवेश के लिए तय किए गए नए दूरी आधारित मानकों के खिलाफ आशीष फुलझेले, अनिकेत कुत्तरमारे और वैभव कांबले ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया। अधि। पायल गायकवाड़, बोधी रामटेके और दीपक चटप ने याचिकाकर्ताओं की पैरवी की।
4 चरणों में बांटी गई प्रक्रिया
आरटीई अधिनियम के तहत निजी गैर-अनुदानित स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और बंचित वर्ग के छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित की जाती हैं। जब आवेदकों की संख्या उपलब्ध सीटों से अधिक होती है तो सभी पात्र छात्रों को समान और भेदभाव रहित अवसर प्रदान करने के लिए कम्प्यूटर आधारित लॉटरी निकाली जाती है। हालांकि विवाद तब शुरू हुआ जब 6 अप्रैल 2026 को राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2026-27 के लिए एक नया आदेश जारी किया।
इस आदेश के तहत लॉटरी प्रक्रिया को दूरी के आधार पर 4 चरणों में बांट दिया गया। इसमें 0-1 किलोमीटर, 1-3 किलोमीटर, 3-5 किलोमीटर और 5 किलोमीटर से अधिक का विकल्प रखा गया। राज्य सरकार ने नए आदेश के जरिए उन्हीं खारिज किए जा चुके प्रतिबंधों को एक नए रूप में फिर से थोप दिया है।
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योग्यता के आधार पर नहीं है वर्गीकरण
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि यह नई प्रणाली छात्रों का वर्गीकरण उनकी पात्रता के आधार पर करने के बजाय उनके निवास और स्कूल के बीच की दूरी के आधार पर कर रही है। इस नई प्रणाली के कारण सबसे पहले 0 से 1 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले छात्रों को प्रवेश में प्राथमिकता दी जाएगी।
यदि इस चरण में ही सारी सीटें भर जाती है तो 1 किलोमीटर से अधिक दूरी पर रहने वाले समान रूप से पात्र और गरीब छात्र केवल दूरी के मापदंड के कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित रह जाएंगे।
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याचिका में अदालत के संज्ञान में लाया गया है कि इससे पहले भी हाई कोर्ट ने आरटीई प्रवेश में दूरी-आधारित प्रतिबंधों को अमान्य कर दिया था। अदालत ने तब स्पष्ट किया था कि ये सीमाएं छात्रों के शिक्षा के अधिकार पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं और वंचित समूह के छात्रों को 1 किलोमीटर से अधिक दूर के स्कूलों में भी प्रवेश लेने का पूरा अधिकार है।
