नासिक में स्टार रेट विवाद में फंसे सिंहस्थ कुंभ मेले के विकास कार्य, मनपा पर ₹200 करोड़ अतिरिक्त बोझ की आशंका
Nashik Star Rate Controversy: सिंहस्थ कुंभ विकास कार्य स्टार रेट विवाद में फंस गए हैं। ठेकेदारों की अतिरिक्त भुगतान मांग से मनपा पर ₹200 करोड़ का भार पड़ सकता है, फैसला सरकार पर निर्भर है।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
स्टार रेट विवाद (सोर्स: AI)
Nashik Star Rate Controversy Kumbh Development: सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत चल रहे हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य अब ‘स्टार रेट’ विवाद में उलझ गए हैं। निर्माण सामग्री की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का हवाला देते हुए ठेकेदारों ने अतिरिक्त दर (स्टार रेट) की मांग की है। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो नासिक महानगरपालिका पर लगभग 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है।
पहले स्थायी समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन विरोध बढ़ने के बाद महासभा में इसे वापस लेकर मानक कार्यप्रणाली (SOP) तैयार करने का निर्णय लिया गया। इस बीच कुंभ मंत्री गिरीश महाजन ने ठेकेदारों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि युद्ध और महंगाई के कारण सीमेंट, स्टील और अन्य निर्माण सामग्री के दाम काफी बढ़ चुके हैं।
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच विवाद
स्टार रेट को मंजूरी मिलने की स्थिति में नासिक मनपा की वित्तीय जिम्मेदारी काफी बढ़ जाएगी, जिससे सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच विवाद तेज हो गया है। विपक्ष का कहना है कि जिन निविदाओं में स्टार रेट का कोई प्रावधान नहीं था, उनमें अनुबंध के बाद अतिरिक्त भुगतान करना नियमों और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो सकते हैं। वहीं कुछ ठेकेदारों ने लागत बढ़ने के कारण कार्यों की गति धीमी कर दी है, जिससे परियोजनाओं के समय पर पूरा होने पर भी असर पड़ सकता है।
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ठेकेदारों का क्या है दावा?
ठेकेदारों का दावा है कि निर्माण लागत में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है और अतिरिक्त दर के बिना परियोजनाएं पूरा करना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। अब राज्य सरकार और मनपा को तय करना है कि स्टार रेट मंजूर किया जाए या मूल अनुबंध की शर्तों के अनुसार ही कार्य पूरे कराए जाएं। कुंभ मेले की समयसीमा को देखते हुए सरकार का फैसला विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
