Nagpur News: PWD का हाई कोर्ट में शपथपत्र, 31 जुलाई तक पूरा होगा RTO फ्लाईओवर
Nagpur News: कार्यकारी अभियंता से अधीक्षक अभियंता के रूप में पदोन्नत नरेश बोरकर द्वारा हाई कोर्ट में शपथपत्र दायर किया गया। पीडब्ल्यूडी विभाग ने हाई कोर्ट में शपथपत्र दायर किया।
- Written By: प्रिया जैस
आरटीओ के सामने फ्लाईओवर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
नागपुर: राष्ट्रीय महामार्गों की दुर्दशा को लेकर अधिवक्ता अरुण पाटिल ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई के दौरान कई राष्ट्रीय महामार्गों की स्थिति पर भी संज्ञान लिया गया। याचिका पर सुनवाई के दौरान आरटीओ के सामने निर्मित हो रहे भोले पेट्रोल पंप से वाड़ी तक के लंबित फ्लाईओवर के कारण हो रही ट्रैफिक की समस्याओं को भी उठाया गया।
इस पर अब पीडब्ल्यूडी विभाग ने हाई कोर्ट में शपथपत्र दायर किया जिसमें यह फ्लाईओवर 31 जुलाई तक पूरा होने की जानकारी कोर्ट को दी गई। विशेषत: ठेकेदार की ओर से की जा रहीं गलतियों से कार्यकारी अभियंता को अवगत कराया गया था जिसमें सुधार का भी अवसर प्रदान किया गया। चूंकि योजना की जिम्मेदारी कार्यकारी अभियंता पर थी, अत: उसे इस मामले में खुलासा करने को कहा गया था।
अधीक्षक अभियंता को राहत
कार्यकारी अभियंता से अधीक्षक अभियंता के रूप में पदोन्नत नरेश बोरकर द्वारा हाई कोर्ट में शपथपत्र दायर किया गया। विशेषत: 21 फरवरी 2024 को हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी किया जिसमें उसके आदेश का पालन नहीं किए जाने एवं गलत हलफनामा दायर किए जाने के कारण अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी है, इस पर अगली तारीख पर विचार करने के संकेत दिए गए थे।
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कार्यकारी अभियंता की कार्यप्रणाली पर भी कोर्ट द्वारा नाराजगी जताई गई थी। अधिकारी के इस तरह के आचरण पर मुख्य अभियंता को हलफनामा दायर करने को कहा गया था, साथ ही यदि हलफनामा से कोर्ट संतुष्ट नहीं होता है तो पीडब्ल्यूडी के प्रधान सचिव को कोर्ट में हाजिर रहने का आदेश देने की चेतावनी भी दी थी। अब कार्यकारी अभियंता द्वारा हलफनामा दायर किए जाने तथा आदेश के इस अंश को हटाने का अनुरोध भी किया गया जिसे हाई कोर्ट द्वारा स्वीकृत किया गया।
भंडारा राष्ट्रीय महामार्ग पर भी आपत्ति
भंडारा राष्ट्रीय महामार्ग को लेकर ठेकेदार कंपनी की ओर से किए जा रहे दावों पर आपत्ति दर्ज करते हुए कोर्ट ने गत आदेश में कहा कि महामार्ग के निर्माण के बाद वैनगंगा एक्सप्रेस-वे प्रा. लि. कंपनी को टोल वसूली शुरू करनी थी। किंतु शर्तों के अनुसार टोल वसूली शुरू करने के लिए पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त करने से पहले पौधारोपण एक अनिवार्य शर्त थी।
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यह माना जा सकता है कि इस प्रक्रिया का पालन किया गया किंतु उसके बाद कंपनी पौधों की सुरक्षा, संरक्षा, जीवनरक्षा आदि सहित उचित उपाय करके उन्हें जीवित रखने में असफल रही है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि गत समय से भंडारा रोड पर यात्रा करने वाले वकीलों सहित सवारियों द्वारा बार-बार शिकायतें की जाती हैं। यहां तक कि कुछ न्यायाधीशों का भी यही अनुभव है। ऐसे में दावा क्यों किया जा रहा है कि उक्त सड़क की न केवल सवारी की गुणवत्ता अच्छी है बल्कि पर्याप्त मात्रा में पौधारोपण भी किया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर यह दिखाई नहीं देता है।
