बुद्ध विहार और आम्बेडकर प्रतिमा हटाने के लिए जनहित याचिका, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप

High Court: बाबासाहब आम्बेडकर की प्रतिमा लगाकर अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए निर्माण को हटाने के लिए ईश्वर सदाशिव चौधरी और अन्य लोगों ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
High Court: बाबासाहब आम्बेडकर की प्रतिमा लगाकर अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए निर्माण को हटाने के लिए ईश्वर सदाशिव चौधरी और अन्य लोगों ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Nagpur News: सरकारी जमीन पर बुद्ध विहार और बाबासाहब आम्बेडकर की प्रतिमा लगाकर किए गए अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए निर्माण को हटाने के लिए ईश्वर सदाशिव चौधरी और अन्य लोगों ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। बुधवार को याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने राज्य सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता की अधिवक्ता तुषार मंडलेकर ने पैरवी की।

पीयू के लिए आरक्षित 4,000 वर्गफुट जमीन

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मंडलेकर ने कहा कि नागपुर जिले के सावनेर तहसील, मौजा दहेगांव (रंगारी) में सरकारी स्वामित्व वाली भूमि है। यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है जिसका लगभग 4,000 वर्गफुट क्षेत्र सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित है। याचिका के अनुसार, ‘आई रमाई झेंडा सुरक्षा समिति महिला मंडल’ ने इस भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया। अतिक्रमणकारियों ने इस जमीन पर तथागत गौतम बुद्ध विहार और डॉ। बाबासाहब आम्बेडकर की प्रतिमा के साथ 3 अन्य प्रतिमाओं का अवैध निर्माण किया है।

कार्यक्रम की अनुमति लेकर किया अवैध निर्माण

याचिका में बताया गया है कि 17 जुलाई 2024 को महिला मंडल ने ग्राम पंचायत दहेगांव (रंगारी) से सार्वजनिक भूमि पर केवल एक बौद्ध कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। ग्राम पंचायत ने बिना किसी प्रस्ताव पारित किए अत्यंत अवैध तरीके से कार्यक्रम की अनुमति दे दी। अतिक्रमणकारियों ने इस अनुमति का अनुचित लाभ उठाया और धार्मिक गतिविधि की आड़ में अवैध निर्माण किया। तस्वीरें प्रस्तुत करते हुए अधिवक्ता मंडलेकर ने कहा कि यह अतिक्रमण सार्वजनिक हित का सीधा उल्लंघन है क्योंकि यह उस सार्वजनिक उपयोगिता वाली भूमि पर है जहां सरकारी हैंड पंप स्थित है जिसके कारण वह सुविधा अब आम जनता के लिए मुश्किल हो गई है।

प्रशासनिक निष्क्रियता और BDO का स्टे आदेश

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं और ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें/निवेदन तहसीलदार, एसडीओ, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों को सौंपे लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और अतिक्रमण अभी भी मौजूद है। 23 अगस्त 2024 को दहेगांव ग्राम पंचायत ने अतिक्रमण हटाने का प्रस्ताव पारित किया था जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि यह भूमि किसी व्यक्ति या समिति को आवंटित नहीं की जा सकती है और यह सार्वजनिक उपयोग के लिए खुली रहेगी।

याचिकाकर्ताओं ने अतिक्रमण हटाने के लिए नायब तहसीलदार, सावनेर के समक्ष एक मामला भी दायर किया था। नायब तहसीलदार ने 7 मई 2025 को महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता 1966 की धारा 50 और 53 के तहत ग्राम पंचायत को अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया। नायब तहसीलदार के आदेश के बावजूद ग्राम पंचायत ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद बीडीओ ने 2 जुलाई 2025 को आदेश पारित करते हुए नायब तहसीलदार द्वारा पारित आदेश पर रोक लगा दी।

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