मजिस्ट्रेट का आदेश भी नहीं मानती पुलिस?-नागपुर ग्रामीण एसपी को हाई कोर्ट का सख्त निर्देश

Nagpur High Court: हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश के बावजूद जब्त ट्रक नहीं छोड़ने पर पारशिवनी पुलिस की कड़ी आलोचना की और संबंधित अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
Does the police not even heed the Magistrate's order? High Court's stern directive to Nagpur Rural SP.
नागपुर हाई कोर्ट, जब्त ट्रक, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्सः एआई फोटो)
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Nagpur High Court Seized Truck: नागपुर याचिकाकर्ता कार्तिक येसने का ट्रक कथित तौर पर बिना परमिट के अवैध रेत परिवहन के आरोप में पुलिस द्वारा पकड़ा गया था। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता के तहत मामला दर्ज होने के बाद वाहन जब्त कर लिया गया था।

मामले की सुनवाई करते हुए 9 जून 2026 को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वाहन को याचिकाकर्ता के सुपुर्द करने का आदेश दिया था किंतु इसका पालन नहीं किए जाने पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बावजूद एक जब्त वाहन को न छोड़ने पर पुलिस की कड़ी आलोचना की। अदालत ने पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) को पारशिवनी पुलिस स्टेशन के अधिकारी किशोर ए। शेरकी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का सख्त निर्देश दिया है।

पुलिस की मनमानी और कागजी हेराफेरी

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पुलिस अधिकारी किशोर ए। शेरकी ने 10 जून 2026 को कागजों पर वाहन सौंपने का पंचनामा और सुपुर्दनामा तैयार किया, यहां तक कि चाबी सौंपते हुए तस्वीरें भी खिंचवाई, लेकिन वास्तव में ट्रक का भौतिक कब्जा याचिकाकर्ता को नहीं दिया गया। उसी दिन शाम को राजस्व विभाग (तलाठी) द्वारा जुर्माना न भरने का हवाला देते हुए वाहन को न छोड़ने के अनुरोध के बाद पुलिस ने अदालत के आदेश के बावजूद ट्रक को थाने में ही रोक लिया।

4 हफ्ते में जमा करें राशि

कोर्ट ने याचिकाकर्ता कार्तिक येसने को राहत देते हुए पारशिवनी के पुलिस निरीक्षक को ट्रक वापस करने का आदेश दिया। हालांकि इसके लिए याचिकाकर्ता को तहसीलदार द्वारा 15 जून 2026 को लगाए गए जुर्माने की राशि 1,45,380 रुपये को रिहाई की पूर्व शर्त के रूप में उप-विभागीय अधिकारी, रामटेक के पास 4 सप्ताह के भीतर जमा करना होगा।

अदालत ने यह भी शर्त रखी है कि याचिकाकर्ता वाहन का रूप नहीं बदलेगा, उसे बेचेगा नहीं और मजिस्ट्रेट द्वारा मांगे जाने पर उसे प्रस्तुत करेगा। वहीं आदेश की अवहेलना करने वाले पुलिस अधिकारी किशोर ए। शेरकी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए नागपुर (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक को आदेश दिए गए हैं।

आदेश की अवहेलना और न्याय प्रणाली में है हस्तक्षेप

कोर्ट ने पुलिस अधिकारी के इस कृत्य को गंभीरता से लिया और पाया कि यह पूरी तरह से न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अवहेलना और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने वाहन सौंप दिया था, लेकिन स्टेशन डायरी की प्रविष्टियों से साबित होता है कि वाहन को अवैध रूप से पुलिस स्टेशन में ही रखा गया था।

इसके अतिरिक्त अदालत ने राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। राजस्व अधिकारियों ने वाहन जब्ती को लेकर महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता की धारा तहत अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिसके तहत जब्त वाहन को 48 घंटे के भीतर डिप्टी कलेक्टर के समक्ष पेश करना आवश्यक है।

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