

Nagpur Police Data Policing: नागपुर शहर की पुलिसिंग अब परंपरागत तरीके से नहीं बल्कि डेटा और जरूरत के आधार पर तय करने की दिशा में बढ़ रही है। शहर के प्रत्येक पुलिस थाने का अपराध, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, आपातकालीन कॉल और उपलब्ध मनुष्यबल समेत 19 मानकों पर स्वतंत्र डेटा तैयार किया गया है।
इसी आधार पर तय होगा कि किस थाने को अतिरिक्त पुलिस बल, वाहन और अन्य संसाधनों की जरूरत है। गुरुवार को आयोजित 'मीट द प्रेस' में सीपी विश्वास नांगरे पाटिल ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहर के सभी पुलिस थानों को समान मनुष्यबल उपलब्ध कराने के बजाय वास्तविक काम के बोझ के अनुसार संसाधनों का वितरण किया जाना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर हुड़केश्वर थाने की सीमा में 112 पर हर महीने करीब 683 कॉल आती हैं, जबकि बजाजनगर में यह संख्या करीब 110 है। ऐसे में दोनों थानों को समान मनुष्यबल देना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि नागपुर जिले की भौगोलिक स्थिति और अपराध के स्वरूप को ध्यान में रखते हुए पुलिसिंग की पुनर्रचना की जा रही है। मुंबई की तर्ज पर शहरी पुलिसिंग के अलग-अलग काम निरीक्षक, द्वितीय निरीक्षक और सहायक निरीक्षक स्तर पर बांटने की योजना है, ताकि कानून-व्यवस्था के साथ-साथ जांच पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जा सके।
पुलिसकर्मियों की शैक्षणिक योग्यता और कौशल के अनुरूप काम सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई है। आर्थिक अपराध शाखा में वाणिज्य की पृष्ठभूमि वाले कर्मचारियों को, जबकि साइबर अपराध की जांच में कंप्यूटर साइंस और बीसीए शिक्षित कर्मियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
संबंधित क्षेत्र में काम करते हुए कर्मचारियों को विशेषज्ञ बनाने पर जोर रहेगा। महिला सुरक्षा के लिए महिला अधिकारियों के नेतृत्व में 12 निर्भया पथक कार्यरत किए गए हैं। व्यस्त पुलिस थानों में आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त्त मनुष्यबल उपलब्ध कराने की भी योजना है।
सेंधमारी और वाहन चोरी की घटनाओं के विश्लेषण में रात 3 से सुबह 5 बजे का समय अपराधियों के लिए अधिक सक्रिय पाया गया है, इसलिए इस अवधि में गश्त को अधिक प्रभावी किया जाएगा। रिहायशी इलाकों में पुलिस सहायता समूह बनाकर स्थानीय सुरक्षा रक्षकों को भी इससे जोड़ा जाएगा।
पुलिस थाने के स्तर पर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के साथ अपराध पुलिस निरीक्षक और पुलिस उपनिरीक्षक की जिम्मेदारियां तय कर गश्त और जांच को अलग-अलग स्तरों पर मजबूत करने की योजना है।
बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए शहर के 130 गश्ती दलों पर मोबाइल ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जा रहे हैं। इससे गश्ती दलों की गतिविधियों और संबंधित क्षेत्र में पुलिस की वास्तविक मौजूदगी पर नजर रखी जा सकेगी। अपराध की जमीनी जानकारी हासिल करने में बीट मार्शल की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए इस व्यवस्था को और सक्षम किया जा रहा है।