पेंच की ‘लंगड़ी’ बाघिन की कहानी, हिम्मत और जज्बे की मिसाल, 18 साल तक रही जंगल की रानी; अब बनी यादों का हिस्सा
Pench Tiger Reserve: पेंच टाइगर रिजर्व की ‘लंगड़ी’ बाघिन ने 18 साल तक जंगल पर राज किया। जन्म से विकलांग होने के बावजूद उसने 10 शावकों को जन्म देकर मिसाल कायम की।
- Written By: अंकिता पटेल
पेंच टाइगर रिजर्व( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nagpur Wildlife Tourism: नागपुर पेंच टाइगर रिजर्व देशभर में मशहूर है। क्या आपको विश्व प्रसिद्ध कहानी ‘द जंगल बुक’ याद है? जी हां, मोगली वाली वो कहानी इसी पेंच के जंगलों से प्रेरित है। टूरिस्ट और वाइल्डलाइफ प्रेमी इस जंगल में खिंचे चले आते हैं, ताकि वे ‘जंगल बुक’ के मशहूर किरदारों ‘अकेला’ (भेड़िया), ‘रक्षा’ (मादा भेड़िया), ‘बालू’ (भालू) और सबसे खूंखार ‘शेर खान’ (बाघ) को असल जिंदगी में देख सकें।
इसी पेंच टाइगर रिजर्व में जन्मी मशहूर बाधिन ‘लंगड़ी’ ने देश में सबसे उम्रदराज बाधिन होने का इतिहास रचा। 18 वर्षों तक जंगल पर राज करने वाली ‘लेजेंडी टाइग्रेस’ की कहानी सिर्फ एक बाघिन की कहानी नहीं है।
यह जज्बे और हिम्मत की वह दास्तां है जो सिखाती है कि अगर आपके अंदर जीने की इच्छाशक्ति है तो आपकी कोई भी कमी आपके मुकद्दर का फैसला नहीं कर सकती।
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वर्ष 2008 में जन्मी लंगड़ी वाधिन बचपन से ही लंगड़ी थी। उसने अपने जीवनकाल के दौरान कुल 10 शाक्कों को जन्म दिया। वर्षों तक जंगल में राज करने के बाद मार्च 2026 में वयोवृद्ध अवस्था में उसका निधन हो गया था।
12 से 14 वर्ष जीते हैं बाघ
आम तौर पर जंगल में एक बाघ की औसत उम्र 12 से 14 साल होती है लेकिन लंगड़ी ने सारी बाधाओं की पार करते हुए करीब 18 साल तक पैथ के जंगलों में राज किया जो कि किसी भी जंगली बाध के लिए बहुत बड़ी बात है। आज भी उसके शावक पैच और उसके आसपास के इलाकों में अपना दबदबा बनाए हुए है।
लंगड़ी होकर भी माहिर शिकारी थी T-20
जंगल का एक बहुत ही सीधा और क्रूर दस्तूर है जो कमजोर है, वो मारा जाएगा। वाइल्डलाइफ में शारीरिक रूप से लाचार होने का मतलब ‘निश्चित मौत’ होता है। लगड़ी जिसे टी-20 के नाम से भी जाना जाता था उसने कुदरत के इस सख्त नियम को तगड़ी चुनौती दी।
जन्म से ही उसके आगे के एक पंजे में खराबी थी लेकिन उसका हौसला किसी भी खूंखार शिकारी से कम नहीं था। लंगड़ी होकर भी उसने शिकार में महारत हासिल की और 10 शावकों को पालने में सक्षम बनी।
दोनों बहनों ने देश में रचा इतिहास
बता दें कि लंगड़ी भारत की सबसे मशहूर बाधिन ‘कॉलरवाली’ बाधिन की सगी बहन थी।
कॉलरवाली बाधिन ने सबसे ज्यादा 29 शावकों को जन्म देकर देश-दुनिया में रिकॉर्ड बनाया था।
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वहीं ‘लंगड़ी ने खामोशी से पैच के जंगलों में अपना एक अलग ही रुतबा कायम करते हुए सबसे उम्रदराज बाधिन होने का इतिहास रवा
मार्च 2026 में वन अधिकारियों को उसका शव मिला, वन्यजीव प्रोटोकॉल के साथ नम आंखों से विभाग ने अपनी इस जांबाज बाधिन को अंतिम विदाई दी।
