अलविदा 'कॉलर वाली' बाघिन! पेंच टाइगर रिजर्व को 29 शावक दे गई 'सुपर मॉम', जानें क्यों कहलाई 'पेंच की मां'

Collarwali Tigress Pench: पेंच की रानी 'कॉलर वाली' बाघिन का विश्व रिकॉर्ड। 29 शावकों को जन्म देकर बनी 'सुपर मॉम'। जानें टी-15 की गौरवशाली गाथा, जिसने भारत में बाघ संरक्षण को दी नई ऊंचाई।
Relive the legacy of 'Collarwali' (T-15), the Super Mom of Pench Tiger Reserve, who holds the world record for giving birth to 29 cubs. A tribute to India's most famous tigress.
कॉलर वाली बाघिन अलविदा (सौजन्य-नवभारत)
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Pench Tiger Reserve History: लगभग 1 दशक पहले भारत में बाघों की संख्या में चिंताजनक कमी हो गई थी। देश के नेशनल एनिमल को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाए गए। यही कारण है कि बाघों के संरक्षण को बूस्ट मिला। इस बीच पेंच टाइगर रिजर्व की प्रमुख बाघिन कॉलर वाली ने टाइगर रिजर्व को बड़ी सौगात दी।

बता दें कि 'सुपर मॉम' कही जाने वाली कॉलर वाली बाघिन ने अपनी अंतिम सांस से पूर्व कुल 29 शावकों को जन्म दिया। अपने जीवन के दौरान 2 दर्जन से अधिक शावकों को जन्म देकर सुपर मॉम ने दुनिया में रिकॉर्ड बनाया। कॉलर वाली बाधिन का 16 वर्ष की आयु में निधन हो गया। इसके बाद उसका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया। वर्ष 2008 से 2018 के बीच बाघिन ने 8 अलग-अलग गर्भधारणों में कुल 29 शावकों को जन्म दिया था।

दुर्भाग्य से 4 शावकों की मौत हो गई थी लेकिन 25 शावकों ने जिंदगी की जंग जीत ली। इन शावकों ने रिजर्व में बाघों की संख्या को बनाए रखने और बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ये शावक अब वयस्क बाघ बन गए हैं और पेंच के जंगलों में घूम रहे हैं। कॉलर वाली को टी-15, सुपर मॉम और पेंच की रानी भी कहा जाता था।

  • 16 वर्ष की आयु में हुई थी मौत
  • 10 वर्षों में दिया शावकों को जन्म
  • 25 शावक जीवित रहने में सफल
  • 4 शावक हार गए जिंदगी की जंग

रेडियो कॉलर वाली देश की पहली बाघिन

  • प्रसिद्ध बाधिन टी-15 उर्फ कॉलर वाली को पेंच की मां के नाम से भी जाना जाता था।
  • 29 शावको जन्म देने के कारण उसे 'सुपर मॉम' का खिताब मिला।
  • उसने एक ही बार में 5 शावकों को जन्म दिया जो किसी बाधिन के लिए बहुत ही दुर्लभ घटना है।
  • सुपर मॉम को 2008 में देहरादून के विशेषज्ञों द्वारा रेडियो कॉलर पहनाया गया था लेकिन उसने 2010 में काम करना बंद कर दिया।
  • इसलिए उसे जनवरी 2010 में फिर से रेडियो कॉलर पहनाया गया।
  • रेडियो कॉलर पहनाए जाने वाली यह पहली बाधिन थी। इसी कारण उसे कॉलर वाली बाघिन कहा जाता है।

कहलाती थी पेंच की रानी

कॉलर वाली बाघिन पेंच की रानी के नाम से भी मशहूर थी। अपनी ताकत, साहस और मातृत्व के लिए जानी जाती थी। सुपर मॉम को न केवल वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नायक के रूप में माना गया बल्कि पर्यटक भी उसे बहुत सम्मान देते थे।

कॉलर वाली बाघिन की विशेषता यह थी कि उसने सभी शावकों को अकेले अपने तरीके से पाला और जंगल के नियमों और शिकार के तरीकों से अवगत कराया। उसकी मातृत्व क्षमता और संरक्षण की प्रतिबद्धता पेंच टाइगर रिजर्व के लिए एक अमूल्य धरोहर बन गई थी।

2005 में जन्मी थी सुपर मॉम

कॉलर वाली बाधिन का जन्म 2005 में हुआ था और 15 जनवरी 2022 को वृद्धावस्था के कारण उसका निधन हो गया। मृत्यु के बाद बाधिन का अंतिम संस्कार पैच के वन विभाग द्वारा किया गया जिसमें उसके योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, उसके जीवन का अंत संरक्षण कार्य में एक मील का पत्थर साबित हुआ। आज सुपर मॉम का नाम पेच टाइगर रिजर्व के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है, बाघ संरक्षण में उसके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।

  • नवभारत लाइव पर नागपुर से अभिषेक सिंह की रिपोर्ट
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