शक्तिपीठ महामार्ग (सोर्स: सोशल मीडिया)
Shaktipeeth Mahamarg Land Acquisition Update: महाराष्ट्र की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक पवनार-पत्रादेवी शक्तिपीठ महामार्ग योजना अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अगस्त में राज्य सरकार द्वारा सांगली तक के मार्ग निर्धारण और भूमि अधिग्रहण को मंजूरी मिलने के बाद जमीन की ‘मोजणी’ या भूमि सर्वेक्षण (Land Survey) का काम तेज गति से पूरा किया जा रहा है।प्रोजेक्ट के ताजा अपडेट के अनुसार राज्यभर के 150 से अधिक गांवों में भूमि सर्वेक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
वर्धा जिला : यहां भूमि सर्वेक्षण का काम सबसे पहले और शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। जिले के सभी 20 गांवों में संयुक्त ‘मोजणी’ प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है।
यवतमाल जिला : यहां कुल 72 गांवों में से 62 गांवों में भूमि सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जबकि शेष गांवों में काम अंतिम चरण में है।
अगला कदम : भूमि सर्वेक्षण पूरा होने के साथ ही अब इन क्षेत्रों में औपचारिक रूप से भूमि अधिग्रहण शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना की महत्ता को देखते हुए सरकार ने इसके लिए भारी निवेश को मंजूरी दी है। पहले चरण के लिए लगभग 12,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। संभावित ब्याज और अन्य खर्चों को मिलाकर कुल लागत 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) ने मार्ग संरेखण का अंतिम कार्य पूरा कर लिया है।
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शुरुआत में कोल्हापुर की कुछ तहसीलों (शिरोल, करवीर, हातकणंगले आदि) में स्थानीय विरोध और आपत्तियों के कारण अधिसूचना रद्द कर दी गई थी। अब सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मार्ग में आवश्यक बदलाव किए हैं। सातारा जिले के कुछ हिस्सों को शामिल करने और कोल्हापुर में मार्ग परिवर्तन के कारण महामार्ग की लंबाई प्रारंभिक 802 किमी से बढ़कर अब लगभग 840 किलोमीटर होने की संभावना है।
धार्मिक और आर्थिक महत्व : महामार्ग न केवल परिवहन का माध्यम है बल्कि महाराष्ट्र की आध्यात्मिक विरासत को भी जोड़ेगा।
तीन मुख्य शक्तिपीठ : माहूर, तुलजापुर और कोल्हापुर।
अन्य तीर्थस्थल : परली बैजनाथ, औंढा नागनाथ, पंढरपुर और नरसोबाची वाडी।