चमकी इमारतें, नहीं सुधरी व्यवस्था, 1100 करोड़ खर्च; फिर भी मेडिकल में 22 जरूरी टेस्ट की सुविधा नहीं
Nagpur Medical College: 1100 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद नागपुर मेडिकल में 22 प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को निजी लैब में भेजे जाने और लंबी वेटिंग पर सवाल उठ रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर मेडिकल, जांच सुविधा संकट, मरीजों की परेशानी,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Medical Tests Shortage: नागपुर जिले में 1100 करोड़ खर्च कर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि अब भी अस्पताल में मरीजों के लिए आवश्यक 22 तरह की टेस्ट सुविधा ही उपलब्ध नहीं है। इसके लिए मरीजों को निजी पैथोलॉजी का रास्ता दिखाया जाता है। इतने वर्षों बाद भी प्रशासन द्वारा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने को लेकर सवाल खड़े किये जा रहे हैं। मेडिकल में मरीजों की भीड़ ज्यादा है।
आधुनिक इमारतें बनीं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं अब भी अधूरी
ओपीडी में हर दिन 2500-3000 मरीजों की जांच की जाती है। इतने ही मरीज वार्डों में भी भर्ती रहते हैं। आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में बिना टेस्ट के निदान नहीं होता लेकिन मेडिकल में किसी भी जांच के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। अब भी सोनोग्राफी, सिटी स्कैन, एमआरआई के लिए 5-25 दिनों की वेटिंग चल रही है।
समय पर टेस्ट नहीं होने से मरीजों के उपचार में दिक्कतें आती हैं। कई बार तो मरीजों की मौत भी सही समय पर इलाज नहीं होने से हो जाती है। सरकार द्वारा मेडिकल को 1100 करोड़ रुपये दिये गये। इससे विविध तरह की इमारतें बनाई गई। इतना ही नहीं, 78 वर्ष पुरानी इमारत को भीतर से टाइल्स लगाकर और रंगरोगन कर चमकाया जा रहा है लेकिन भीतरी वैद्यकीय व्यवस्था में सुधार अब भी नहीं हुआ है।
सम्बंधित ख़बरें
मुंबई में दिल्ली हादसे के बाद BMC सख्त, होटलों-बारों में 20 जून तक चलेगा जांच अभियान; अवैध निर्माणों पर एक्शन
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: ट्रांसजेंडर्स को बिजनेस के लिए मिलेगी 2 लाख तक की मदद, जानें कैसे उठाएं फायदा
गहरी नींद का उठाया फायदा, नागपुर के पास ट्रेन में चोरी; RPF-GRP ने 48 घंटे में सुलझाया केस
‘राम भरोसे मत रहिए’, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी, ठेकेदारों-अधिकारियों पर फूटा सीएम फडणवीस का गुस्सा
टेस्ट सुविधाओं की कमी से मरीज, दलालों के भरोसे
दलालों को मिली खुली छूट टेस्ट में देरी की वजह से ही मेडिकल में निजी पैथोलॉजी के दलाल सक्रिय हो गये हैं। यह दलाल हर दिन वार्डों में जाकर रक्त, पेशाब संबंधी नमूने लेकर जाते हैं। निजी पैथोलॉजी के दलाल को डॉक्टरों का पूरा सपोर्ट मिल रहा है। इतना ही नहीं, कुछ डॉक्टरों ने तो निजी पैथोलॉजी के साथ टाइ-अप’ भी कर रखा है।
जो मरीज आर्थिक रूप से सक्षम है वह निजी पैथोलॉजी से टेस्ट करा लेता है, लेकिन अनेक मरीजों को मेडिकल में टेस्ट के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इन टेस्ट रिपोर्ट की वजह से कई बार नियोजित ऑपरेशन तक टालना पड़ता है।
यह भी पढ़ें:-गहरी नींद का उठाया फायदा, नागपुर के पास ट्रेन में चोरी; RPF-GRP ने 48 घंटे में सुलझाया केस
इतने वर्षों बाद भी और इतनी निधि मिलने के बाद भी अधिष्ठाता द्वारा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराना कई सवाल खड़े करता है। प्रशासन को जवाब देने के लिए अधिष्ठाता डॉ. राज गजभिये ने भले ही बाहर से टेस्ट नहीं कराने का निर्देश तो जारी कर दिया लेकिन पर्यायी व्यवस्था के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यह टेस्ट मेडिकल में नहीं होती
| क्रमांक | टेस्ट का नाम |
|---|---|
| 1 | सिरम एंटी एनएमओ, एमओजी |
| 2 | अपर यूरिनरी कॉपर |
| 3 | टीएमएस, जीसीएमएस |
| 4 | एएनए, एंटी एलकेएम, एसएमए |
| 5 | होल एक्सोम सिक्वेंसिंग |
| 6 | पी-ANCA, सी-ANCA |
| 7 | गाउचर टेस्ट |
| 8 | सी-3, सी-5 लेवल |
| 9 | एसडीपी ब्लड |
| 10 | आईजीटी लेवल, ईएसआर, ग्राम टेस्ट |
| 11 | सीएसएफ (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड) जांच |
| 12 | प्रोटोथेकोसिस वर्कअप |
| 13 | प्रोटीन C, प्रोटीन S, फैक्टर D |
| 14 | एएनए ब्लॉट |
| 15 | टीटीजी / डीजीपी टेस्ट |
| 16 | एंटी फैक्टर H |
| 17 | ALPA / MLPA |
| 18 | रीनल बायोप्सी |
| 19 | HBB जीन टेस्ट |
| 20 | ईईजी (Electroencephalogram) |
| 21 | eGFR |
| 22 | CMV PCR |
