

NSUI Youth Congress Protest: महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर आज राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के निजी आवास की ओर मार्च कर रहे युवा कांग्रेस और NSUI के दर्जनों कार्यकर्ताओं को पुलिस ने जबरदस्त धक्का-मुक्की के बीच हिरासत में ले लिया। यह पूरा विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा जबरन लागू किए जा रहे E-20 पेट्रोल के खिलाफ था।
प्रत्यक्षदर्शियों और मौके से सामने आए वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि नागपुर की सड़कों पर भारी पुलिस बल तैनात था। जैसे ही प्रदर्शनकारियों का जत्था गडकरी के आवास की ओर बढ़ा, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए शारीरिक बल और बैरिकेड्स का इस्तेमाल किया।
स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब कार्यकर्ताओं ने घेरा तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को जबरन घसीटते हुए हिरासत में ले लिया और पुलिस वैन में भर दिया।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे युवा कांग्रेस नेता मेहुल आडवाणी को जब पुलिस घसीटकर ले जा रही थी, तब उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, हम अपने ऊपर थोपे जा रहे E-20 पेट्रोल की कड़ी निंदा करते हैं। यह जनता के साथ धोखा है और हम अपनी यह लड़ाई जारी रखेंगे। कार्यकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि देश में चलने वाले पुराने वाहनों के इंजन इस उच्च इथेनॉल मिश्रण के अनुकूल नहीं हैं, जिससे वाहनों के खराब होने और उनके रखरखाव का खर्च बढ़ने का खतरा है।
आंदोलनकारियों ने विशेष रूप से नितिन गडकरी के घर को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें भारत में बायोफ्यूल क्रांति का मुख्य Architect माना जाता है। गडकरी लगातार इथेनॉल मिश्रण की वकालत करते रहे हैं, लेकिन विपक्ष अब इसे आम जनता की जेब पर डाका बता रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार भले ही E-20 को पर्यावरण और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए जरूरी बता रही हो, लेकिन उपभोक्ता और विशेषज्ञ इसे लेकर आशंकित हैं। इथेनॉल में शुद्ध पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा का घनत्व कम होता है, जिसका सीधा मतलब है कि वाहन का माइलेज कम हो जाएगा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कम माइलेज के कारण यह आम आदमी पर एक प्रकार का हिडन फ्यूल टैक्स है।
नागपुर, जो कि RSS का मुख्यालय भी है, वहां गडकरी के घर के बाहर इस तरह का विरोध प्रदर्शन करना कांग्रेस की एक बड़ी राजनीतिक चाल मानी जा रही है। विपक्ष इसके जरिए शहरी और मध्यम वर्ग के उन मतदाताओं को साधना चाहता है, जो पेट्रोल की कीमतों और वाहन के रखरखाव के बढ़ते खर्च से परेशान हैं।
फिलहाल, पुलिसिया कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया गया है, लेकिन मेहुल आडवाणी और उनकी टीम के तेवर साफ बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में E-20 का यह मुद्दा देशव्यापी बहस का कारण बन सकता है।