

Why Abhijit Dipke Return To India: देश की राजनीति और युवा आंदोलनों के केंद्र में उभरे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अमेरिका छोड़कर भारत लौटने और देश में अपने आंदोलन की नींव रखने की असली वजह से पर्दा उठाया है। उन्हाेंने राजनीतिक दलों से संपर्क और भविष्ण की रणनीति पर भी खुलकर बात रखी।
अपने गृहनगर महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके ने विदेश से भारत लौटने के अपने फैसले पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वे अमेरिका से भारत क्यों लाैंटे हैं।
अभिजीत दिपके ने कहा कि जब वे अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे, तब सभी लोग उन्हें एक भारतीय छात्र के रूप में जानते थे। उन्होंने कहा कि उनके प्रोफेसर और मित्र उन्हें भारत के प्रतिनिधि के रूप में देखते थे लेकिन उन्हें यह जानकर दुख हुआ कि अपने ही देश में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। इस अनुभव ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया और इसी कारण वे वापस लौटे।
राजनीतिक दलों से संपर्क के सवाल पर अभिजदीत दिपके ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने किसी से बातचीत नहीं की। हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा उनसे मिलने आए थे और उन्होंने बताया कि वे राहुल गांधी की ओर से समर्थन का संदेश लेकर आए हैं। कांग्रेस के कई सांसदों ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से भी समर्थन मांगा था और उनका प्रयास विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद बनाए रखने का रहा है।
नई राजनीतिक पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने की संभावनाओं को खारिज करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि फिलहाल देश को एक पब्लिक प्रेशर ग्रुप की जरूरत है। उन्होंने आपातकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल चुनाव लड़ना हर समस्या का समाधान नहीं होता। जब लोकतंत्र पर खतरा महसूस होता है तो व्यापक जन-आंदोलन की आवश्यकता होती है। इसी कारण फिलहाल उनका फोकस जनदबाव और जनभागीदारी के माध्यम से बदलाव लाने पर है।
CJP प्रमुख ने कहा कि उनका संघर्ष किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था की उसकी कमियों के खिलाफ है। वर्तमान में केंद्र में भाजपा की सरकार होने के कारण उनके आंदोलन का विरोध वर्तमान सरकार के खिलाफ रहा। यदि भविष्य में कोई अन्य दल सत्ता में होगा और वही समस्याएं बनी रहेंगी तो उनका संगठन उस दल के खिलाफ भी आवाज उठाएगा।
अभिजीत दिपके ने कहा कि जहां बातचीत से समाधान निकल सकता है, वहां सरकार और विपक्ष दोनों से संवाद किया जाएगा। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो उनका संगठन लोकतांत्रिक तरीके से जन-आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेगा।
कॉकरोच जनता पार्टी के भविष्य को लेकर अभिजीत दिपके ने बताया कि उनकी प्राथमिकता सबसे पहले अपनी टीम को फिर से संगठित करना है। आंदोलन की शुरुआत केवल 10 से 20 लोगों के साथ हुई थी लेकिन अब वॉलंटियर्स की संख्या 300 से अधिक हो गई है। वे पहले सभी स्वयंसेवकों से फीडबैक लेंगे, यह समझेंगे कि आंदोलन के दौरान क्या बेहतर किया जा सकता था और किन गलतियों से बचा जा सकता था। इसके बाद संगठन की आगे की दिशा और संरचना पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।
नीट पेपर लीक मुद्दे को लेकर दिल्ली में हुए आंदोलन के दौरान असामाजिक तत्वों की मौजूदगी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए दिपके ने कहा कि उन्होंने पहले ही आशंका जताई थी कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहरी तत्व भेजे जा सकते हैं।
अभिजीत दिपके ने दावा किया कि आंदोलन के शुरुआती एक महीने तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने दिल्ली पुलिस के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें बड़ी संख्या में अपराधियों की मौजूदगी की बात कही गई थी। दिपके ने पूछा कि यदि इतने अपराधी मौजूद थे तो उन्हें वहां रहने की अनुमति किसने दी और सुरक्षा व्यवस्था में यह चूक कैसे हुई।
काॅकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके ने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, कम से कम उनकी सुनवाई तो होनी ही चाहिए। किसी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं तो कानून के अनुसार मुकदमा चलना चाहिए लेकिन न्यायिक प्रक्रिया समय पर पूरी होनी भी आवश्यक है।