प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. नवभारत)
Nagpur Division 3 Civic Issues News: उत्तर नागपुर के प्रभाग-3 स्थित गरीब नवाज नगर के शाहू मोहल्ले की गलियों में आज भी उम्मीद जिंदा है, लेकिन विकास की रफ्तार यहां अब तक नहीं पहुंच सकी है। चार दशक से अधिक समय से यहां रह रहे हजारों परिवार आज भी अपने घरों के मालिकाना हक के पट्टों का इंतजार कर रहे हैं। अतिक्रमण की स्थिति में बसे इस इलाके को न तो बुनियादी सुविधाएं मिल पाई हैं और न ही योजनाबद्ध विकास।
पानी, सड़क और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं, इनके अभाव में लोग रोजमर्रा की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक उन्हें वैध पट्टे नहीं मिलते, तब तक इलाके का समुचित विकास संभव नहीं है। पट्टों के अभाव में न तो पक्की सड़कें बन पा रही हैं और न ही स्थायी जल आपूर्ति या ड्रेनेज व्यवस्था का काम हो पा रहा है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की अनदेखी से लोगों में निराशा है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि जल्द समाधान निकलेगा।
गर्मी के मौसम में पानी की कमी को देखते हुए इलाके में कुछ बोरवेल लगाए गए थे लेकिन योजना के अभाव में बोरवेल के ठीक पास गटर लाइन और चैबर बना दिए गए। यदि गटर लाइन में लीकेज या चोकिग हो जाती है, तो बोरवेल का पानी भी दूषित और बदबूदार जाता है। ऐसी स्थिति में लोग बोरवेल का उपयोग बंद कर देते हैं और मरम्मत का इंतजार करते हैं। स्थानीय नागरिकों ने माग की है कि बोरवेल और गटर लाइन को अलग किया जाए, ताकि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
इलाके में स्थित शीतला माता मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर के ठीक पीछे वर्षों पुराना नाला बहता है, जिसकी लंबे समय से सफाई नहीं हुई है, नाला कचरे से अटा पड़ा है और उसमें से उठती बदबू आसपास के वातावरण को प्रभावित कर रही है। मंदिर में नियमित रूप से धार्मिक आयोजन होते हैं, लेकिन नाले की दुर्गंध से श्रद्धालुओं को असुविधा होती है। स्थानीय नागरिकों ने मनपा प्रशासन से मांग की है कि नाले की नियमित सफाई की जाए, ताकि स्वच्छता बनी रहे और भक्तों को राहत मिल सके।
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गरीब नवाज नगर के शाहू मोहल्ले में पेयजल संकट की गंभीर समस्या है। यहां दो पाइप लाइन बिछाई गई हैं, एक पुरानी और एक नई लेकिन पुरानी पाइप लाइन गटर लाइन के समीप से गुजरती है, जिससे लीकेज की स्थिति में नलों से दूषित और बदबूदार पानी आने लगता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलापूर्ति शुरू होने पर पहले कुछ देर तक गंदा पानी बहाना पड़ता है। उसके बाद ही साफ पानी आता है। कई बार तब तक जल आपूर्ति का समय ही समाप्त हो जाता है। इससे पीने के पानी की समस्या और गहरा जाती है।