किसान आत्महत्या रोकने की कुंजी जल संवर्धन, हर गांव में जलक्रांति जरूरी; नागपुर में बोले नितिन गडकरी
Nagpur Water Conservation: नितिन गडकरी ने कहा कि विदर्भ में किसान आत्महत्याओं का प्रमुख कारण सिंचाई की कमी है। जल संवर्धन और जनसहभागिता से किसानों का जीवन बदला जा सकता है।
- Written By: अंकिता पटेल
नितिन गडकरी, किसान आत्महत्या, (सोर्स: फोटो नवभारत)
Nagpur Nitin Gadkari Farmer Suicides: नागपुर केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि विदर्भ में किसानों की आत्महत्याओं का प्रमुख कारण सिंचाई की कमी है। जल संवर्धन के माध्यम से किसानों का जीवन बदला जा सकता है। इसके लिए प्रत्येक गांव में जल संवर्धन, नदी गहरीकरण और चौड़ीकरण के कार्य जनसहभागिता से किए जाने चाहिए, उन्होंने कहा कि जल संवर्धन ही किसान आत्महत्याओं को रोकने की कुंजी है। उन्होंने राज्यभर से आए सांसदों, विधायकों, सरपंचों और ग्राम पंचायत सदस्यों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र में पानी की एक-एक बूंद को संचित करने के लिए कार्य करें।
वे पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था के रजत जयंती वर्ष के निमित्त सुरेश भट सभागृह रेशिमबाग में आयोजित ‘जलक्रांति परिषद 2026’ में बोल रहे थे। इस अवसर पर राज्य के जलसंधारण मंत्री संजय राठौड़, नाम फाउंडेशन के अध्यक्ष नाना पाटेकर, सचिव मकरंद अनासपुरे, पंकृवि के उपकुलपति डॉ. शरद गडाख, गोंडवाना यूनिवर्सिटी के उपकुलपति डॉ. प्रशांत बोकारे सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य उपस्थित थे।
जल आंदोलन खड़ा करने की जरूरत
गडकरी ने कहा कि पूर्ति संस्था ने पिछले 25 वर्षों में जल संवर्धन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। बुलढाना पैटर्न और तामसवाडा पैटर्न जैसे प्रयोगों की सफलता मिली। उन्होंने प्रत्येक गांव में नदी गहरीकरण, चौड़ीकरण और जल संग्रहण का जन आंदोलन खड़ा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पानी की हर
बूंद जमीन में संचित होनी चाहिए, यदि बाढ़ के रूप में बहने वाले पानी को रोका जाए तो खेती और गांवों का भविष्य बदल सकता है। उन्होंने कहा कि नदी को स्वच्छ रखना केवल सरकार की नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। विदर्भ के सभी जिलों को आत्महत्या मुक्त बनाने का संकल्प लेने की अपील भी उन्होंने की।
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इस अवसर पर ‘जलक्रांति’, ‘जलपर्व’, ‘कॉरिडोर ऑफ वॉटर सिक्योरिटी’ और ‘कृषि कल्याण’ नामक चार पुस्तकों का विमोचन किया गया। डॉ. प्रशांत बोकारे ने गोंडवाना विश्वविद्यालय के माध्यम से चलाए जा रहे जल संवर्धन और कृषि विकास परियोजनाओं की जानकारी दी, जबकि डॉ. शरद गडाख ने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अनुसंधान और विस्तार कार्यों की समीक्षा प्रस्तुत की। इस अवसर पर विधायक किशोर जोरगेवार, पूर्व सांसद सुनील मेंढे, विधायक परिणय फुके, जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद, महापौर नीता ठाकरे तथा माफसू के उपकुलपित डॉ. नितिन पाटिल उपस्थित थे।
जलप्रहरियों का सम्मान
जल संवर्धन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पद्म श्री सुभाष शर्मा, पद्म श्री चैतराम पवार, अनिकेत आमटे, डॉ. शरद गडाख, कर्नल सुरेश पाटिल, डॉ. प्रभात जैन, सुरेश खानापुरकर, वी।डी। पाटिल, मिलिंद जोशी, बासासाहब ढंग, माघव कोटस्थानी, सचिन कुलकर्णी, विकास तौतडे और मिलिंद भगत का सम्मान किया गया। साथ ही पूर्ति सिचन संस्था के योगदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वर्गीय प्रभाकरराव मुडले के पुत्र निखिल मुडले, स्वर्गीय बाबासाहब बोदरे की पत्नी प्रभा बौदरे, भूवैज्ञानिक स्वर्गीय रविंद्र काली की पत्नी सरोज रविंद्र काली तथा सीएसआर के माध्यम से सहायता देने वाली विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों का भी सम्मान किया गया।
जल संवर्धन का दिया जाए प्रशिक्षण : अनासपुरे
मकरंद अनासपुरे ने कहा कि नाम फाउंडेशन का कार्य केवल विदर्भ तक सीमित नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और असम तक पहुंच चुका है। उन्होंने इसे इंसानों द्वारा इंसानों के लिए शुरू किया गया मानवता का आंदोलन बताया, उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में जल संवर्धन का प्रशिक्षण देने की आवश्यकता जताई और चेतावनी दी कि यदि हमने प्रकृति का विचार नहीं किया, ती प्रकृति भी हमारा विचार नहीं करेगी।
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अतिक्रमण मुक्त होंगे मालगुजारी तालाब : राठौड़
- राज्य मंत्री संजय राठौड़ ने जल संवर्धन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और घटता भूजल स्तर गंभीर समस्याएं है। भविष्य में पानी मानव अस्तित्व का सबसे बड़ा प्रश्न बन सकता है।
- उन्होंने बताया कि जल संवर्धन के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। कई गांव टैंकर मुक्त हो चुके है और हजारों मालगुजारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान शुरू किया गया है।
एकजुट होकर काम करें : पाटेकर
नाना पाटेकर ने कहा कि यदि हम अपने गांव को ही अपना भारत मानकर कार्य करें तो देश समृद्ध होगा। पानी की एक भी बूंद व्यर्थ न जाए, इसके लिए लोगों को स्वयं आगे आने की आवश्यकता है, उन्होंने सभी संस्थाओं से मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने गडकरी के कार्यों की सराहना करते हुए गांव, किसान और प्रकृति से जुड़कर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही उन्होंने बताया कि नाम फाउंडेशन का कार्य देशभर में फैल रहा है और नागपुर में नाम फाउंडेशन का कार्यालय शुरू करने की इच्छा भी व्यक्त की।
