‘चल जाता है’ अब नहीं चलेगा! नितिन गडकरी ने इंजीनियरों को दी सख्त चेतावनी
Nitin Gadkari News: नितिन गडकरी ने नागपुर में अभियंताओं से ‘चल जाता है’ रवैये को छोड़ने और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, नैतिकता और प्री-कास्टिंग तकनीक अपनाने की अपील की।
- Written By: अर्पित शुक्ला
नितिन गडकरी (सौजन्य-IANS)
Nagpur News: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को अभियंताओं से कहा कि वे ‘चल जाता है’ का रवैया छोड़ दें और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के लिए प्रयास करें, क्योंकि यह उनकी कार्य नीति से जुड़ा है। उन्होंने यहां इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स द्वारा आयोजित फोरेंसिक सिविल इंजीनियरिंग पर अखिल भारतीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सड़क और भवन निर्माण में ‘प्री-कास्टिंग’ (पहले ही ढांचा ढाल कर उसे निर्माण स्थल पर स्थापित करना) की वकालत की।
गडकरी ने कहा कि एक बार डिजाइन पैटर्न तैयार हो जाए तो लागत कम हो जाएगी और गुणवत्ता में भी सुधार होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बहुत प्रगति हो रही है, खासतौर पर सिविल इंजीनियरिंग में। अभियंताओं को सुनिश्चित करना चाहिए कि कार्य घटिया गुणवत्ता का न हो क्योंकि यह उनकी कार्य की नैतिकता से जुड़ा है। हमें उत्पादन लागत कम करने और निर्माण की गुणवत्ता में सुधार करने की आवश्यकता है।”
उन्होंने साथ ही सरकारी सिविल कार्यों से जुड़े अभियंताओं के एक वर्ग से ‘चल जाता है’ दृष्टिकोण को त्यागने का आह्वान किया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने पुल ढहने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए निवारक उपाय करने के लिए इस पहलू पर अनुसंधान की आवश्यकता को रेखांकित किया। गडकरी ने बिहार में इस तरह की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि खामियों का पता लगाने के लिए ऑडिट होना चाहिए और जो लोग ‘दुर्भावनापूर्ण’ गलतियां करते हैं उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा, ‘‘सरकारी संस्थानों और निजी ठेकेदारों द्वारा विश्व मानकों पर सफल पद्धतियों को स्वीकार करने की आवश्यकता है। भविष्य में सिविल इंजीनियरिंग के विकास में पूर्णता की ओर बढ़ना बहुत महत्वपूर्ण है। गुणवत्ता और नई तकनीकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स से सड़क और भवन निर्माण में ‘प्री-कास्टिंग’ को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘एक बार डिजाइन पैटर्न तैयार हो जाए तो निर्माण की लागत कम हो जाएगी और गुणवत्ता भी बेहतर होगी। जो दुर्घटनाएं होती रहती हैं, वे भी नहीं होंगी।”
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गडकरी ने नवाचार के बारे में कहा कि कई स्थानों पर रेत की उपलब्धता की समस्या का समाधान पत्थर के चूरे से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने दक्षिणी राज्य की नदियों और लैगून झीलों की सफाई करने तथा सड़क निर्माण के लिए सामग्री का उपयोग करने के उनके अनुरोध को मंजूरी दे दी है। गडकरी ने कहा कि यह पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है। उन्होंने अमृत सरोवर मिशन का उदाहरण दिया, जिसके तहत महाराष्ट्र में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा 1000 से अधिक जल निकायों का पुनरुद्धार किया गया है। -एजेंसी इनपुट के साथ
